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गाय में विराजमान पवित्रता ही हमारे जीवन की पूंजी है : शंकराचार्य

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
गया (बिहार)। गौमतदाता संकल्प यात्रा के अंतर्गत ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने गया में आयोजित गौमतदाता संकल्प सभा को संबोधित किया। हजारों गौभक्तों की उपस्थिति में उन्होंने कहा कि गाय पवित्रता की प्रतिमूर्ति हैं। जैसे प्रकाश हटने से अंधकार छा जाता है, वैसे ही पवित्रता हटने से जीवन अपवित्र हो जाता है। उन्होंने कहा कि गौमाता का मल-मूत्र तक पवित्र है और यही कारण है कि संत-महात्मा सदैव गौ रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं।
शंकराचार्य जी ने कहा कि सूर्य की हजारों किरणों में प्रकाश, पोषण और आयुष्य तीन प्रमुख हैं। प्रकाश को आंखें, पोषण को धरती और आयुष्य को गाय अपने कंधे पर धारण करती है। दूध, दही और घृत से मानव आयुष्य की वृद्धि होती है और पंचगव्य पाप से मुक्ति दिलाता है। उन्होंने कहा कि जहां गौमाता होती हैं, वहां न रोग रह सकता है न पाप।
उन्होंने राजा गया की कथा सुनाते हुए बताया कि भगवान विष्णु की आराधना कर वे पवित्रता की जीवंत मूर्ति बने। उनके शरीर पर यज्ञ होने के बाद गया की भूमि पवित्र हो गई और यहां पिंडदान व तर्पण करने से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त हुआ। शंकराचार्य जी ने कहा कि गाय और गया दोनों पवित्र हैं और सनातन धर्म की रक्षा के लिए गौरक्षा का संकल्प लेना होगा। उन्होंने चिंता जताई कि आज तिलक, चोटी, कांछ जैसी परंपराएं लुप्त हो रही हैं, समलैंगिकता को अपराध से मुक्त किया जा रहा है और अश्लीलता को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे समय में धर्म की रक्षा के लिए सभी सनातनियों को आगे आना होगा।
सभा में बड़ी संख्या में गौभक्त और संत शामिल हुए। इससे पूर्व शंकराचार्य जी का गया आगमन पर विभिन्न स्थानों पर पूजन-अर्चन और स्वागत हुआ। गौमतदाता संकल्प यात्रा में संयोजक स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुंदानंद गिरी, सहसंयोजक देवेंद्र पांडे, स्वामी श्रीनिधिरव्यानंद, शैलेन्द्र योगी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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