– धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई पहचान
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने महाभारत सर्किट के अंतर्गत बरेली जिले के पौराणिक स्थल अहिच्छत्र को विकसित करने के लिए 2 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि यह कदम बरेली को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
अहिच्छत्र का उल्लेख महाभारत काल में उत्तरी पांचाल की राजधानी के रूप में मिलता है। बरेली से लगभग 50 किलोमीटर दूर आंवला तहसील स्थित यह किला प्राचीन वैभव और स्थापत्य कला का प्रतीक है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) द्वारा संरक्षित इस स्थल पर 19वीं और 20वीं सदी में हुई खुदाई में कई बहुमूल्य अवशेष मिले हैं, जिन्हें विभिन्न संग्रहालयों में सुरक्षित रखा गया है।
पर्यटन मंत्री ने बताया कि विकास कार्यों के अंतर्गत प्रवेश द्वार, सौंदर्यीकरण, प्रकाश व्यवस्था, शौचालय, सूचना केंद्र, पेयजल और विश्राम स्थल जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। जैन धर्मावलंबियों के लिए अहिच्छत्र का विशेष महत्व है, क्योंकि यही वह स्थान है जहां 23वें जैन तीर्थंकर पार्श्वनाथ ने कैवल्य ज्ञान प्राप्त किया था। यहां आज भी बड़ी संख्या में जैन अनुयायी आते हैं।
इतिहास के अनुसार, भगवान बुद्ध ने भी अहिच्छत्र में सात दिन प्रवास किया था और नाग राजाओं को धर्म दीक्षा दी थी। बाद में सम्राट अशोक ने यहां बौद्ध स्तूपों का निर्माण कराया। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी अपने यात्रा वृत्तांत में यहां के विहारों का उल्लेख किया है।
बरेली धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। वर्ष 2024 में यहां 1.15 करोड़ पर्यटक आए थे, जबकि 2025 की पहली तिमाही में ही 28 लाख 61 हजार पर्यटक पहुंचे। अनुमान है कि साल के अंत तक यह संख्या 1.25 करोड़ तक पहुंच सकती है। बढ़ते पर्यटक आगमन से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था सशक्त हो रही है, बल्कि नए रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं।