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ICICI बैंक में 50 हज़ार रखना होगा जरूरी, मिनिमम बैलेंस लिमिट बढ़ी

– बढ़ी सेविंग अकाउंट की मिनिमम बैलेंस लिमिट
– 10 साल बाद मिनिमम बैलेंस की सीमा में बदलाव
– सालाना आधार मुनाफा 15.45% बढ़ा

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
नई दिल्ली। ICICI बैंक ने अपने बचत खाताधारकों के लिए मिनिमम बैलेंस की सीमा में बड़ा बदलाव किया है। अब 1 अगस्त 2025 से खोले जाने वाले नए सेविंग अकाउंट्स में ग्राहकों को खाते में कम से कम ₹50,000 का औसतन बैलेंस बनाए रखना होगा। इससे कम राशि होने पर बैंक पेनल्टी वसूल सकता है।
बैंक की नई गाइडलाइन के मुताबिक, यह बदलाव सिर्फ मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव और अर्ध-शहरी इलाकों में भी मिनिमम बैलेंस की लिमिट बढ़ा दी गई है। अब मेट्रो और शहरी क्षेत्रों में ₹50,000, सेमी-अर्बन में ₹25,000 और ग्रामीण क्षेत्रों में ₹10,000 का न्यूनतम औसत बैलेंस (MAB) मेंटेन करना अनिवार्य होगा। इससे पहले मेट्रो और शहरी इलाकों में यह सीमा ₹10,000, अर्ध-शहरी में ₹5,000 और ग्रामीण खातों के लिए ₹2,500 थी। यानी ग्रामीण इलाकों में भी अब चार गुना ज्यादा राशि रखना जरूरी हो गया है। ICICI बैंक ने लगभग 10 साल बाद मिनिमम बैलेंस की सीमा में बदलाव किया है, और यह देश में सबसे ज्यादा MAB रखने की शर्त वाला बैंक बन गया है।
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देश के 11 सरकारी बैंकों ने भी बीते 5 वर्षों में मिनिमम बैलेंस न रखने पर ग्राहकों से करीब ₹9,000 करोड़ की पेनल्टी वसूली है, जिससे यह मुद्दा पहले से ही विवाद में रहा है। अब ICICI बैंक की इस नई नीति से आम ग्राहकों की जेब पर और अधिक असर पड़ सकता है, खासकर उन लोगों पर जो सीमित आय में काम चलाते हैं। बैंक की ओर से यह कदम डिजिटल और प्रीमियम बैंकिंग सेवाओं की लागत और मेंटेनेंस को देखते हुए उठाया गया है, लेकिन इससे कम आय वाले ग्राहकों को अपनी बचत योजना पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है।
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ICICI बैंक ने पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में कुल ₹51,452 करोड़ की कमाई की है। इस कमाई में से बैंक ने 32,706 करोड़ रुपए कर्मचारियों की सैलरी, बिजली बिल, डिपॉजिट जैसे कामों में खर्च किए। इसके बाद बैंक के पास 12,768 करोड़ रुपए मुनाफा के रूप में बचा। एक साल पहले की समान अवधि में बैंक को 11,059 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। सालाना आधार यह 15.45% बढ़ा है।

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