वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/अजय कुमार
बांदा। जिले में एक सफाई कर्मचारी अपनी सैलरी न मिलने से परेशान होकर पत्नी बच्चों सहित जिलाधिकारी (डीएम) के पास पहुंचा। पीड़ित कर्मचारी का आरोप है कि ग्राम प्रधान और एडीओ पंचायत की लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण पिछले 6 महीने से उसकी सैलरी रोकी गई है, जिससे उसका जीवनयापन मुश्किल हो गया है। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि मामले में जांच की जा रही है।
मामला कुछ यूं है कि चिल्ला थाना क्षेत्र के रहने वाले पीड़ित सफाई कर्मचारी मीतू की ड्यूटी इन दिनों लौमेर ग्राम पंचायत में है। कथित तौर पर पिछले 6 महीने से उसका सैलरी रुका हुआ है। एडीओ पंचायत की तरफ से सैलरी नहीं दिया जा रहा है. ग्राम प्रधान भी हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं. जिससे उसका सैलरी रुका हुआ है। पीड़ित ने आरोप लगाया है कि एडीओ पंचायत सैलरी बनाने के एवज में दस हजार रुपये की मांग कर रहे हैं। उसने आगे बताया कि सैलरी न मिलने से घर का राशन खत्म हो गया है, फीस न देने के कारण बच्चों का नाम स्कूल से काट दिया गया। मेरे 6 बच्चे हैं। सभी की पढ़ाई बाधित है। पीड़ित ने डीएम से सैलरी दिलाने की मांग की है। जिससे उसके बच्चे की पढ़ाई शुरू हो सके। उधर डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद का कहना है कि सफाई कर्मचारी का सैलरी न मिलने का मामला मेरे संज्ञान में आया है, जिसका सैलरी पिछले सितंबर माह से नहीं मिला है। उसका सैलरी क्यों रोका गया है, इसकी जांच करा रहा हूं। जांच के बाद उसका सैलरी जारी किया जाएगा और कार्रवाई भी की जाएगी।