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महाकुंभ में उपमुख्यमंत्री द्वारा महिला स्वयं सहायता समूह और उद्यमी सम्मानित

वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/ अजय कुमार
प्रयागराज। महाकुंभ प्रयागराज 2025 के सेक्टर 1 में सूचना विभाग के सांस्कृतिक पंडाल में आज खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में महिला स्वयं सहायता समूहों और उद्यमियों को सम्मानित करने हेतु भव्य समारोह का आयोजन किया गया। फल, शाकभाजी, मसाले, दूध, बेकरी उत्पाद, पास्ता, नूडल्स, गुड़, चिप्स, फूड सप्लीमेंट्स और सोलर प्लांट्स जैसी इकाइयों के उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई थी। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने फीता काटकर और दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने महिला समूहों और उद्यमियों को सम्मानित करते हुए उनके कार्यों की सराहना की ।
श्री मौर्य ने उत्पादों का अवलोकन किया और महिला समूहों द्वारा की गई पहल की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार लगातार प्रयासरत है। यह क्षेत्र राज्य में आईटी सेक्टर के बाद रोजगार सृजन के सबसे बड़े अवसर प्रदान करता है, जिससे न केवल इस उद्योग का बल्कि अन्य संबंधित क्षेत्रों का भी विकास संभव हो रहा है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में अपार संभावनाओं को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार कई महत्वाकांक्षी योजनाएं चला रही है। वर्तमान में राज्य में 65,000 से अधिक खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां संचालित हैं, जिनसे 2.55 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। इस क्षेत्र में आटा, चावल, फल-सब्जी, मसाला, हेल्थ फूड, बेकरी, दुग्ध और मांस प्रसंस्करण जैसी इकाइयां सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।
उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति – 2023 के माध्यम से सरकार ने प्रदेश में निवेश आकर्षित करने के लिए नई पहल की है। इस नीति के तहत उद्यमियों को इकाई स्थापित करने के लिए 10 करोड़ रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है। अब तक 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया गया है, और वित्तीय वर्ष 2024-25 में 70 इकाइयों को 85 करोड़ रुपये का अनुदान वितरित किया गया है।
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएम एफएमई) की उपलब्धियों पर बात करते हुए श्री मौर्य ने बताया कि उत्तर प्रदेश ने इस योजना में राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त किया है। बैंकों द्वारा 14,300 इकाइयों को 4,500 करोड़ रुपये का अनुदान स्वीकृत किया गया है, जिससे 1.50 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। इस योजना के तहत राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की 2,000 महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षित कर 12 करोड़ रुपये का सीड कैपिटल प्रदान किया गया है।
कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री मौर्य ने कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता पर जोर दिया और उद्यमियों से अपील की कि वे अधिक से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले प्रस्ताव लेकर आएं, ताकि किसानों और युवाओं को इसका लाभ मिल सके। उन्होंने पीएम एफएमई योजना की सब्सिडी नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रोजेक्ट स्वीकृति और ऋण मिलने के 30 दिनों के भीतर सब्सिडी प्रदान कर दी जाएगी।

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