वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ/वाराणसी। उत्तर प्रदेश कांग्रेस में वरिष्ठ नेता अजय राय को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। महिला कांग्रेस की दलित नेता ममता चौधरी के साथ कथित गाली-गलौज और प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद पार्टी के भीतर उनके भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, अजय राय कांग्रेस छोड़ेंगे या पार्टी नेतृत्व उन्हें नई जिम्मेदारी देकर मनाने की कोशिश करेगा, इस पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
पार्टी के भीतर विवाद उस समय और गहरा गया, जब प्रदेश कांग्रेस के नए नेतृत्व के कार्यभार संभालने के दौरान कहासुनी और हंगामे की चर्चा सामने आई। ममता चौधरी ने अजय राय पर दलितों के प्रति भेदभावपूर्ण व्यवहार के आरोप लगाने और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से शिकायत करने की बात कही है। इन आरोपों पर अजय राय का पक्ष सामने आना बाकी है।
प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने की नाराजगी :
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अजय राय की नाराजगी की वजह केवल हालिया विवाद नहीं, बल्कि प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने का तरीका भी हो सकता है। माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर उनके रुख और पार्टी के मौजूदा नेतृत्व की रणनीति के बीच मतभेद रहे हैं। हालांकि, इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
नई जिम्मेदारी देकर मनाने की चर्चा :
कांग्रेस के भीतर यह संभावना भी जताई जा रही है कि नेतृत्व अजय राय को किसी दूसरे प्रदेश का प्रभार देकर उनकी नाराजगी दूर करने की कोशिश कर सकता है। गुजरात जैसे राज्य की जिम्मेदारी सौंपे जाने की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में है, लेकिन इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई औपचारिक जानकारी नहीं दी गई है।
बनारस की राजनीति पर टिकी नजरें :
अजय राय वाराणसी की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव भी लड़ चुके हैं। ऐसे में उनके अगले कदम को लेकर पूर्वांचल की राजनीति में भी दिलचस्पी बनी हुई है। भाजपा में वापसी की अटकलें भी लगाई जा रही हैं, लेकिन इसकी पुष्टि करने वाला कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अजय राय पार्टी नेतृत्व के साथ अपने मतभेद सुलझाकर कांग्रेस में बने रहते हैं या कोई दूसरा राजनीतिक रास्ता चुनते हैं। उनके अगले कदम और कांग्रेस नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं।