वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। आर्थिक रूप से कमजोर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) परिवारों की बेटियों के विवाह में आर्थिक मदद देने के लिए संचालित शादी अनुदान योजना के तहत चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 53,546 लाभार्थियों को सहायता दी जा चुकी है। इनके बैंक खातों में कुल 107.092 करोड़ रुपये की धनराशि भेजी गई है। योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को बेटी के विवाह के लिए 20 हजार रुपये की सहायता दी जाती है।
पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के तहत 1,05,000 लाभार्थियों को सहायता देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए 210 करोड़ रुपये का बजट लक्ष्य रखा गया है। अब तक विभाग को 1,09,697 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें से 53,546 पात्र लाभार्थियों को अनुदान उपलब्ध कराया गया है। पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशक अस्मिता लाल ने बताया कि योजना का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को बेटी के विवाह के समय आर्थिक संबल प्रदान करना है।
सीधे बैंक खाते में मिलती है सहायता :
योजना का लाभ उन ओबीसी परिवारों को दिया जाता है, जिनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये तक है। निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले परिवारों को 20 हजार रुपये की धनराशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। विवाह के लिए लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष होना आवश्यक है। दिव्यांग, विधवा, दैवीय आपदा से प्रभावित और भूमिहीन परिवारों को योजना में प्राथमिकता दी जाती है, ताकि आर्थिक रूप से अधिक जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाई जा सके।
विभाग का जोर पात्र आवेदनों के समयबद्ध निस्तारण पर है। ग्रामीण क्षेत्रों और कम आय वाले परिवारों के लिए बेटियों के विवाह का खर्च बड़ी आर्थिक जिम्मेदारी होता है। ऐसे में शादी अनुदान योजना के माध्यम से मिलने वाली सहायता परिवारों पर आर्थिक बोझ कम करने में मदद करती है। चालू वित्तीय वर्ष में निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष अब तक आधे से अधिक लाभार्थियों को सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है।