वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी का 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और लखनऊ स्थित संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसजीपीजीआई) में उनका उपचार चल रहा था। उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। निधन की खबर से बलिया से लेकर लखनऊ तक सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई।
बलिया से निकले रामगोविंद चौधरी प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे। वह आठ बार विधानसभा के लिए चुने गए और समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली। वर्ष 2017 से 2022 तक वह उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे। सदन में वह सरकार को घेरने और जनहित से जुड़े मुद्दे उठाने के लिए जाने जाते थे।
रामगोविंद चौधरी का समाजवादी आंदोलन से पुराना जुड़ाव रहा। राजनीतिक जीवन के शुरुआती दौर में उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के साथ भी काम किया। बाद में सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के साथ उनका लंबा राजनीतिक सफर रहा। पार्टी संगठन को मजबूत करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती रही। अखिलेश यादव ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया। उन्होंने एक्स पर लिखा कि समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी का निधन अत्यंत दुखद है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति देने और शोकाकुल परिवार को यह दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा में रामगोविंद चौधरी को वरिष्ठ और भरोसेमंद नेताओं में माना जाता था। उनके निधन से पार्टी ने अनुभवी समाजवादी नेता खो दिया है।