वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने प्रदेश के चिकित्सकों से मरीजों के परामर्श-पर्चे पर दवाओं के नाम हिंदी अथवा देवनागरी लिपि में भी लिखने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि इससे मरीज आसानी से समझ सकेंगे कि उन्हें कौन सी दवा दी गई है और चिकित्सा व्यवस्था में उनके विश्वास को और मजबूती मिलेगी।
उपमुख्यमंत्री ने चिकित्सकों को भेजे पत्र में कहा कि मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए दवाओं के नाम हिंदी में लिखने को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही मरीजों से उनकी मातृभाषा या स्थानीय भाषा में संवाद किया जाए। उन्होंने कहा कि भोजपुरी, अवधी, ब्रजभाषा जैसी स्थानीय भाषाओं में चिकित्सक मरीजों की समस्याएं बेहतर ढंग से समझ सकते हैं और अपनी सलाह भी आसानी से समझा सकते हैं। इससे चिकित्सक और मरीज के बीच संवाद तथा विश्वास मजबूत होगा।
ब्रजेश पाठक ने कहा कि लोकतंत्र लोकभाषा और जनभाषा के माध्यम से अधिक मजबूत होता है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का संकल्प लिया जा सकता है। उन्होंने राष्ट्रनायकों और महापुरुषों के विचारों से प्रेरणा लेते हुए जनसामान्य से जुड़ी व्यवस्थाओं में देशज भाषाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी विदेशों में हिंदी सहित भारतीय भाषाओं के माध्यम से संवाद कर देश की भाषाई पहचान को मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने चिकित्सकों से चिकित्सा संवाद को सरल और स्थानीय भाषा में बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ‘चले देश में देशज भाषा के भाव’ को जनसेवा का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।