वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ/आजमगढ़। आजमगढ़ में करीब आठ घंटे चले संवेदनशील रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद दो मासूम बच्चियों को सुरक्षित बचाने वाली पुलिस अब उनके भविष्य को संवारने के लिए भी आगे आई है। एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने एक माह का वेतन और जिले के सभी पुलिसकर्मियों ने एक-एक दिन का वेतन सहायता के रूप में देने की घोषणा की है। यह धनराशि दोनों बच्चियों के नाम एफडी के रूप में जमा कराई जाएगी।
पुलिस के अनुसार 22/23 सितंबर की रात आहरौला थाना क्षेत्र के शम्भूपुर गांव में तीन लोगों की हत्या के बाद आरोपी अरविंद अपने तीन बच्चों और लाइसेंसी रिवॉल्वर के साथ कमरे में बंद हो गया था। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने करीब सात से आठ घंटे तक उससे बातचीत कर आत्मसमर्पण के लिए मनाने का प्रयास किया। एहतियात के तौर पर एटीएस भी मौके पर मौजूद थी। इसी दौरान कमरे के भीतर गोली चलने की आवाज सुनाई दी। बच्चों की जान बचाने के लिए एसएसपी डॉ. अनिल कुमार, एसओजी प्रभारी संजय सिंह और आरक्षी प्रदीप ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया। आरोपी ने पुलिस टीम पर फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई के बीच पुलिसकर्मियों ने दोनों बच्चियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। वहीं नौ वर्षीय शौर्य गोली लगने से घायल हो गया। अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। पोस्टमार्टम और बैलिस्टिक जांच में गोली आरोपी की रिवॉल्वर से चलने की पुष्टि हुई। पुलिस दोनों बच्चियों की शिक्षा और पालन-पोषण में सहयोग कर रही है। 11 वर्षीय बच्ची को मानसिक आघात से उबरने के लिए चाइल्ड साइकेट्रिस्ट से परामर्श और मनोवैज्ञानिक सहयोग भी दिलाया जा रहा है।
डीजीपी राजीव कृष्ण ने आजमगढ़ पुलिस की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में पुलिस ने धैर्य और साहस के साथ संवेदनशीलता दिखाई। प्रभावित परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए जिला प्रशासन से भी समन्वय किया जा रहा है।