– लखनऊ कोचिंग अग्निकांड के बाद भी नींद से नहीं जागा प्रशासन
– 65 हजार में से 5,647 स्कूली वाहनों की फिटनेस फेल, 7,418 का परमिट खत्म
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
कानपुर। लखनऊ में हुए दर्दनाक कोचिंग अग्निकांड के बाद शासन ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्ती के दावे किए थे। इसके बावजूद प्रदेश में स्कूली बच्चों को ढोने वाले हजारों वाहनों की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 5,647 स्कूली वाहन बिना फिटनेस और 7,418 वाहन बिना वैध परमिट के संचालित हो रहे हैं। यानी 13 हजार से अधिक वाहनों में बच्चों की सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल बने हुए हैं।
परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन के निर्देश पर एक से 15 जुलाई तक मिशन सेफ फ्यूचर अभियान चलाया गया था। अब विभाग सेफ फ्यूचर अभियान 2.0 की तैयारी में जुटा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पहले अभियान के बाद भी यदि हजारों वाहन फिटनेस और परमिट के बिना सड़क पर दौड़ रहे हैं तो दूसरे अभियान से व्यवस्था में कितना बदलाव आएगा।
कानपुर मंडल आरटीओ (प्रवर्तन) राहुल श्रीवास्तव के मुताबिक इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मैनेजमेंट पोर्टल पर प्रदेश में 65,162 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं। इनमें 5,647 वाहनों की फिटनेस नहीं है, जबकि 7,418 के परमिट समाप्त हो चुके हैं। विभाग की ओर से संबंधित स्कूल प्रबंधकों को कमियां दूर करने के लिए नोटिस जारी किए गए और फोन के माध्यम से भी चेतावनी दी गई। सबसे गंभीर स्थिति स्कूली वाहनों के चालकों के सत्यापन को लेकर सामने आ रही है। विभाग के पास इस बात का स्पष्ट डाटा उपलब्ध नहीं है कि बच्चों को ले जाने वाले सभी चालकों का पुलिस सत्यापन कराया गया है या नहीं। ऐसे में चालक के आपराधिक इतिहास और उसकी पृष्ठभूमि की जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
शासन की ओर से सांसदों और विधायकों को स्कूलों में जाकर प्रबंधकों व अभिभावकों को जागरूक करने के निर्देश भी दिए गए थे। आरोप है कि यह अभियान कई स्थानों पर औपचारिकता तक सीमित रहा। वहीं, विभाग की ओर से सख्त कार्रवाई के बजाय नोटिस और सुधार का मौका देने की नीति पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।