वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश को केवल उपचार आधारित व्यवस्था तक सीमित न रखते हुए आयुष, योग, पंचकर्म, प्राकृतिक चिकित्सा और वेलनेस सेवाओं के समन्वय से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। रविवार को आयुष विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने ‘आयुष हेल्थ एंड वेलनेस नीति-2026’ को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश देते हुए कहा कि आयुष सेवाओं को आधुनिक प्रबंधन, गुणवत्ता मानकों और पर्यटन से जोड़कर ऐसा मॉडल तैयार किया जाए, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं के साथ रोजगार और निवेश को भी नई गति मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत, आयुर्वेद एवं योग की परंपरा तथा धार्मिक पर्यटन सर्किट को आयुष वेलनेस सेक्टर से जोड़ा जाए। वाराणसी, अयोध्या और मथुरा जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के आसपास वेलनेस और हीलिंग आधारित पर्यटन विकसित करने की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने आयुष संस्थानों को उपचार केंद्रों के साथ-साथ वेलनेस, प्रशिक्षण, अनुसंधान और रोजगार सृजन के केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में वर्तमान में 3953 आयुष स्वास्थ्य इकाइयां, 1034 आयुष्मान आरोग्य मंदिर, 225 योग वेलनेस सेंटर और 19 आयुष चिकित्सा महाविद्यालय संचालित हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पीपीपी मॉडल के माध्यम से आधुनिक आयुष वेलनेस सेंटर, 100 शैय्या वाले एकीकृत आयुष चिकित्सा एवं प्रशिक्षण केंद्र तथा आयुष कॉलेजों के उन्नयन की दिशा में चरणबद्ध कार्रवाई की जाए।
प्रस्तावित नीति के अंतर्गत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, आयुष वेलनेस एवं चिकित्सा केंद्र तथा प्रशिक्षण युक्त एकीकृत संस्थानों के विकास का प्रस्ताव रखा गया है। इन केंद्रों में पंचकर्म, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, डिजिटल हेल्थ सेवाएं तथा अनुसंधान एवं नवाचार गतिविधियों को भी शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निवेशकों को एकल खिड़की प्रणाली के माध्यम से त्वरित स्वीकृतियां उपलब्ध कराने और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही मीरजापुर, गोंडा, मेरठ, आगरा और बस्ती मंडलों में एकीकृत आयुष महाविद्यालयों की स्थापना में तेजी लाने पर भी बल दिया।