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सीएसआईआर-एनबीआरआई में शिव भभूत निर्माण सुविधा व एआई आधारित हर्बेरियम प्रणाली का शुभारंभ

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। सीएसआईआर की महानिदेशक एवं डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी ने 31 जनवरी 2026 को सीएसआईआर–राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान, लखनऊ का भ्रमण किया। इस अवसर पर उन्होंने “सततता हेतु विज्ञान: देवता, भक्त, खोज एवं प्रलेखन (2S–4D)” विषय के अंतर्गत आयोजित वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और तकनीकी गतिविधियों में सहभागिता की तथा समाजोपयोगी पहलों का लोकार्पण किया।

कार्यक्रम की शुरुआत मानकामेश्वर मंदिर में शिव भभूत निर्माण सुविधा को समाज को समर्पित करने के साथ हुई। डॉ. ए. के. शासनी, निदेशक सीएसआईआर-एनबीआरआई ने बताया कि मंदिर परिपत्र अर्थव्यवस्था पहल के तहत पुष्प अर्पण जैसे पवित्र अपशिष्ट को स्वदेशी तकनीक से शिव भभूत में परिवर्तित किया जा रहा है। इस भभूत का वैज्ञानिक परीक्षण कर इसे मानव उपयोग के लिए सुरक्षित प्रमाणित किया गया है। यह पहल आस्था, विज्ञान और सततता का अनूठा उदाहरण है, जिसे काशी विश्वनाथ मंदिर में भी सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है।

डॉ. कलैसेल्वी ने संस्थान की बहुविषयक गतिविधियों की सराहना करते हुए महिला-केन्द्रित कौशल विकास, आजीविका सृजन और सूक्ष्म परिपत्र अर्थव्यवस्था पहलों को विशेष रूप से उल्लेखनीय बताया। इसके बाद उन्होंने बनथरा स्थित महर्षि पराशर जैव-संसाधन केंद्र में पावन पथ, विभव एन्क्लेव और भैरव एन्क्लेव जैसे जैव-विविधता उद्यानों का उद्घाटन किया और वृक्षारोपण में भाग लिया।

सीएसआईआर-एनबीआरआई परिसर में भारत के राज्य पौध उद्यान भैरव एन्क्लेव और संकटग्रस्त वनस्पतियाँ उद्यान विभव एन्क्लेव का अनावरण किया गया। इन उद्यानों में क्यूआर कोड आधारित डिजिटल जानकारी उपलब्ध कराई गई है, जिससे आगंतुकों को संवादात्मक शिक्षण अनुभव मिल सके। प्रशिक्षण हॉल में आयोजित कार्यक्रम में कृषि और मानव स्वास्थ्य से जुड़ी दो स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का हस्तांतरण भी किया गया। कपास उत्पादन बढ़ाने वाले बायो-स्टिमुलेंट “समृद्धि” का हस्तांतरण कोरोमंडल इंटरनेशनल को तथा पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य हेतु हर्बल सप्लीमेंट तकनीक का हस्तांतरण हिमालया वेलनेस को किया गया।

इसके साथ ही एलडब्ल्यूजी हर्बेरियम में एआई आधारित ड्रोणा प्रणाली और क्यूआर टैगिंग का शुभारंभ किया गया। 2.25 लाख से अधिक पादप नमूनों वाले इस हर्बेरियम का डिजिटल रूपांतरण वनस्पति अनुसंधान को नई गति देगा। डॉ. कलैसेल्वी ने विज्ञान, संस्कृति और प्रौद्योगिकी के समन्वय को समकालीन चुनौतियों के समाधान के लिए आवश्यक बताया।

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