वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को राजधानी में यूपी हेल्थटेक कॉन्क्लेव 1.0 का शुभारंभ करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश केवल 25 करोड़ की आबादी वाला राज्य नहीं, बल्कि देश और पड़ोसी राज्यों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं की पूर्ति का सबसे बड़ा केंद्र भी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को मेडिकल टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर इनोवेशन और फार्मा मैन्युफैक्चरिंग का राष्ट्रीय व वैश्विक हब बनाने की दिशा में सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलाकर केवल 40 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि आज 81 मेडिकल कॉलेज पूरी तरह क्रियाशील हैं। इसके साथ ही दो एम्स, 100 से अधिक जिला अस्पताल, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स का मजबूत नेटवर्क तैयार किया गया है, जिससे अंतिम पायदान तक निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल भवन खड़े करना नहीं, बल्कि आमजन को सम्मानजनक इलाज उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रदेश में 5.5 करोड़ परिवारों को गोल्डन कार्ड जारी किए गए हैं, जिससे गरीबों को पांच लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज मिल रहा है। स्वास्थ्य सुधारों का परिणाम मातृ एवं शिशु मृत्युदर में गिरावट के रूप में सामने आया है। इंसेफेलाइटिस जैसी घातक बीमारी को नियंत्रित कर प्रदेश में शून्य मृत्यु का लक्ष्य हासिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि अब टेक्नोलॉजी के माध्यम से ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ को साकार करना अगला लक्ष्य है। टेलीमेडिसिन, एआई आधारित स्क्रीनिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को और सुलभ बनाया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने UP-IMRAS सॉफ्टवेयर का लोकार्पण और क्लिनिकल ट्रायल्स से जुड़ी एसओपी पुस्तक का विमोचन भी किया।