वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खां ने ‘आई लव मोहम्मद’ विवाद पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि यह भाईचारा खत्म करने की सोची-समझी साजिश थी। उन्होंने जिला प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर प्रशासन चाहता, तो यह मामला बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता था। आजम खां ने कहा कि “अगर मैं इसे चिंगारी भी कहूं तो सवाल यह है कि यह छोटी-सी बात इतनी बड़ी आग कैसे बन गई।” उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है—चाहे हालात कितने भी बिगड़े हों, समाधान बातचीत की मेज पर ही निकलता है।
आजम खां ने कहा कि यह विवाद देश की गंगा-जमुनी तहजीब को चोट पहुंचाने की कोशिश थी। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उसने जानबूझकर मामले को बढ़ने दिया, जबकि संवाद से इसे आसानी से सुलझाया जा सकता था। उन्होंने कहा, “जंग के नतीजे देखिए… यह तो सद्भाव बिगाड़ने की साजिश थी। अगर कोई किसी से प्यार करता है, तो यह उसका जन्मसिद्ध अधिकार है।”
गौरतलब है कि यह विवाद चार सितंबर 2025 को कानपुर के रावतपुर स्थित सैयद नगर में ‘आई लव मोहम्मद’ बैनर लगाए जाने से शुरू हुआ था। रामनवमी शोभायात्रा मार्ग पर लगाए गए इस बैनर का विरोध हुआ, जिसके बाद तनाव फैल गया। पुलिस ने बैनर हटवाया और दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया, लेकिन बाद में विवाद बढ़ता गया और कई जिलों में तनाव की स्थिति बन गई। दिवाली के अवसर पर आजम खां ने अपने एक और बयान में कहा कि “दीये जलते नहीं, बल्कि रोशन किए जाते हैं।” उन्होंने कहा कि रोशनी का मतलब नफरत मिटाना और ठंडक देना है। सपा नेता ने कहा कि उनसे मिलने आने वाले लोग समझते हैं कि उनके साथ गलत हुआ है, और उनकी हमदर्दी उनके लिए दवा का काम कर रही है।