वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। रोशनी के पर्व दिवाली के बाद राजधानी की हवा में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ गया है। सोमवार रात आतिशबाजी के बाद शहर की वायु गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। मंगलवार को लखनऊ का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 246 दर्ज किया गया, जो ऑरेंज जोन में आता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह स्तर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। शहर के विभिन्न इलाकों में धुंध और धुएं की परत छाई हुई है। सुबह और शाम के समय दृश्यता घटने से लोगों को आवाजाही में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रदूषण के कारण सांस संबंधी रोगों, आंखों में जलन, सिरदर्द और हृदय रोगियों के लिए खतरा बढ़ गया है। चिकित्सकों ने बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। पर्यावरण विशेषज्ञों ने बताया कि प्रदूषण के प्रमुख कारणों में आतिशबाजी से निकला धुआं, वाहनों का अत्यधिक उत्सर्जन और ठंड के चलते हवा में धुंध का जमाव शामिल है। उन्होंने लोगों से अनावश्यक वाहन प्रयोग से बचने और घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनने की अपील की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक मौसम में सुधार की संभावना कम है। ऐसे में लोगों को खुद की सुरक्षा पर ध्यान देना होगा। साथ ही, प्रशासन को प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है ताकि राजधानी की हवा फिर से स्वच्छ हो सके।