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दूध: संपूर्ण आहार, स्वास्थ्य और विकास का आधार

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। दूध मानव जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पौष्टिक आहार है, जिसे प्रकृति की अनमोल देन माना जाता है। यह एक अपारदर्शी श्वेत द्रव है, जो स्तनधारी मादाओं की स्तन ग्रंथियों द्वारा निर्मित होता है। नवजात शिशु का जीवन प्रारंभिक अवस्था में पूरी तरह दूध पर ही निर्भर रहता है, क्योंकि वह अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन करने में सक्षम नहीं होता। साधारणतः दूध में लगभग 85 प्रतिशत जल होता है, जबकि शेष भाग में वसा, खनिज, प्रोटीन और अन्य ठोस तत्व शामिल होते हैं।
दूध प्रोटीन, कैल्शियम और राइबोफ्लेविन यानी विटामिन बी-2 का प्रमुख स्रोत है। इसके साथ ही इसमें विटामिन ए, डी, ई और के के अलावा फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, आयोडीन जैसे खनिज भी पाए जाते हैं, जो शरीर के समुचित विकास और ऊर्जा के लिए आवश्यक हैं। गाय और भैंस के दूध के साथ-साथ आज बाजारों में मदर डेयरी, अमूल, पराग और आँचल जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों का पैक्ड दूध भी आसानी से उपलब्ध है। इन दूध उत्पादों में विटामिन ए, कैल्शियम और लौह तत्व अतिरिक्त रूप से मिलाए जाते हैं, जिससे इनकी पोषण गुणवत्ता और बढ़ जाती है।
माँ का दूध शिशु के लिए एक संपूर्ण और सर्वोत्तम आहार है, जिसमें प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और खनिज सही अनुपात में होते हैं, जो शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity) बढ़ाता है, उसे संक्रमणों से बचाता है, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के विकास में मदद करता है, और मोटापा, एलर्जी व डायबिटीज जैसी बीमारियों का खतरा कम करता है, साथ ही यह माँ को भी स्तन कैंसर जैसी बीमारियों से बचाता है।माँ का दूध सिर्फ एक भोजन नहीं, बल्कि शिशु के संपूर्ण स्वास्थ्य और विकास के लिए एक प्राकृतिक दवा और सुरक्षा कवच है, जो उसे जीवन भर स्वस्थ रहने की नींव देता है।
आयुर्वेद के अनुसार गाय का ताजा दूध सर्वोत्तम माना गया है। गाय का दूध पतला होता है और आसानी से पच जाता है, इसलिए कम भोजन करने वाले और कमजोर पाचन शक्ति वाले लोगों के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी है। गाय के दूध में प्रति ग्राम लगभग 3.14 मिलीग्राम कोलेस्ट्रॉल पाया जाता है। वहीं भैंस का दूध अधिक गाढ़ा और ऊर्जावान होता है। भैंस के दूध में प्रोटीन, कैल्शियम और खनिजों की मात्रा अधिक पाई जाती है, जिससे यह वजन और मांसपेशियों को मजबूत करने में सहायक होता है। भैंस के दूध में प्रति ग्राम लगभग 0.65 मिलीग्राम कोलेस्ट्रॉल होता है, जो गाय के दूध की तुलना में कम है।
इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. एच. एस. छाबड़ा के अनुसार भैंस का दूध गाय के दूध से बेहतर माना जा सकता है, क्योंकि इसमें मिनरल अधिक और कोलेस्ट्रॉल कम होता है। भैंस के दूध में प्रति ग्राम ०.६५ मिली ग्राम कोलेस्ट्रॉल होता है। भैंस के दूध में गाय के दूध की तुलना में ९२ प्रतिशत कैल्शियम, ३७ प्रतिशत लौह और ११८ प्रतिशत अधिक फॉस्फोरस होता है। आयुर्वेद में भी अखाड़ों में जाने वाले और शारीरिक श्रम करने वालों के लिए भैंस के दूध को उपयोगी बताया गया है।
दूध को संपूर्ण आहार इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें लगभग वे सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जिनकी मानव शरीर को आवश्यकता होती है। प्रकृति में कोई अन्य एकल पेय या खाद्य पदार्थ ऐसा नहीं है, जो शरीर की लगभग सभी पोषण जरूरतों को पूरा कर सके। बच्चों के लिए दूध को संतुलित और पूर्ण आहार का दर्जा दिया गया है। अगर हम दूध में मौजूद पानी की बात करें तो सबसे ज्यादा पानी गधी के दूध में 91.5% होता है, घोड़ी में 90.1%,Women में 87.4%, गाय में 87.2%, ऊंटनी में 86.5%, बकरी में 86.9% होता है।
दूध उत्पादन के आंकड़े बताते हैं कि देश में मांग की तुलना में उत्पादन अभी भी कम है। बारहवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान दूध उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन बढ़ती जनसंख्या के कारण मांग लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नस्ल सुधार, बेहतर चारा, स्वच्छ पानी और आधुनिक प्रबंधन से ही दूध उत्पादन में वृद्धि संभव है।
दूध की उत्पादन का लक्ष्य 12वें पंचवर्षीय प्लान (2010-2017) में बढ़कर 26.95 लाख मैट्रिक टन करने की है जबकि 2010-11 में हमारी दूध की मांग या जरूरत 33.69 लाख मैट्रिक टन थी। यह आंकड़े यह दर्शाते हैं कि हमारी पूर्ति माँग से काफी कम है जिसके लिए हमें नस्ल सुधार से लेकर जानवरों के लिए चारा, दाना, पानी और प्रबंधन पर बहुत ज्यादा मेहनत की जरूरत है। इंटरनेशनल डेयरी जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार रोजाना कम से कम एक गिलास दूध पीने वाले लोग मानसिक और बौद्धिक रूप से अधिक स्वस्थ पाए गए हैं। यह अध्ययन दूध के महत्व को और भी अधिक रेखांकित करता है, जिससे स्पष्ट होता है कि दूध न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है।

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