वेब वार्ता ( न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन (पीएम–एफएमई) योजना का क्रियान्वयन देश में सबसे तेज़ गति से जारी है, जिसने राज्य को इस महत्वाकांक्षी योजना का सबसे प्रभावी मॉडल बना दिया है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के मार्गदर्शन और कुशल नेतृत्व में खाद्य प्रसंस्करण विभाग ने सूक्ष्म खाद्य उद्योगों को बढ़ावा देने में जिस तत्परता और पारदर्शिता के साथ कार्य किया है, वह अब पूरे देश के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया है।
खाद्य प्रसंस्करण विभाग से प्राप्त अधिकारिक जानकारी के अनुसार राज्य में प्राप्त आवेदन और प्रस्तावों की औसत स्वीकृति अवधि मात्र 100 दिन दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत की तुलना में बेहद कम मानी जा रही है। स्वीकृत प्रस्तावों का स्ट्राइक रेट 98 प्रतिशत तक पहुँचना यह दर्शाता है कि योजनाओं का चयन न केवल तेज़ी से हो रहा है, बल्कि सही पात्रों तक प्रभावी ढंग से पहुँच भी रहा है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश आज इस योजना में देश के सभी राज्यों को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान पर है।
खाद्य प्रसंस्करण विभाग से प्राप्त अधिकारिक जानकारी के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष 2025–26 में योजना के तहत ₹311.71 करोड़ की धनराशि आवंटित की गई थी, जिसके सापेक्ष राज्य सरकार द्वारा ₹252.89 करोड़ की राशि व्यय कर दी गई है। विभाग द्वारा केंद्र सरकार को तीसरी किश्त के लिए बजट मांग पत्र भी भेजा जा चुका है, जिससे योजना की निरंतरता और तेज़ क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।