वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार अब हार्ट अटैक आने पर मरीजों के प्रारंभिक उपचार को और प्रभावी बनाने जा रही है। प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और चयनित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में लगभग 40 से 50 हजार रुपये कीमत वाला जीवनरक्षक इंजेक्शन निशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। अब तक यह सुविधा केवल चुनिंदा अस्पतालों तक सीमित थी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश जारी कर इसे पूरे प्रदेश में लागू करने का निर्णय लिया है। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रदेश सरकार गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासरत है। हार्ट अटैक मरीजों के लिए जीवनरक्षक इंजेक्शन का मुफ्त उपलब्ध होना एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि जल्द ही अन्य गंभीर बीमारियों के लिए भी अत्याधुनिक उपचार सामग्री सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध कराई जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार हार्ट अटैक के बाद मरीज को कार्डियोलॉजी विभाग तक पहुंचने में अक्सर देरी हो जाती है, जिससे मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है। इसी स्थिति से निपटने के लिए निर्णय लिया गया है कि इमरजेंसी में पहुंचते ही मरीज को टेनेक्टेप्लाज या स्ट्रेप्टोकाइनेज का इंजेक्शन तुरंत लगाया जाएगा। यह इंजेक्शन खून का थक्का बनने से रोकता है और मरीज की स्थिति स्थिर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके बाद मरीज को सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में रेफर किया जाएगा। पहले चरण में यह व्यवस्था हब एंड स्पोक मॉडल के अंतर्गत केजीएमयू, लोहिया संस्थान, एसजीपीजीआई, बीएचयू, सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी, एएमयू और एमएलएन मेडिकल कॉलेज प्रयागराज की इमरजेंसी में शुरू की गई थी। अब इसे सभी जिला अस्पतालों तक विस्तारित किया जा चुका है और जहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ईसीजी व अन्य आवश्यक जांच सुविधाएं मौजूद हैं, वहां भी इस इंजेक्शन को उपलब्ध कराया जा रहा है।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. रतनपाल सिंह सुमन ने बताया कि सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को इंजेक्शन का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस इंजेक्शन के समय पर लगने से गंभीर स्थिति बनने से रोका जा सकता है।
महानिदेशक प्रशिक्षण डॉ. पवन कुमार अरुण ने बताया कि पहले चरण के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अब प्रदेशभर में इसे लागू किया जा रहा है। लखनऊ, अयोध्या, देवीपाटन, वाराणसी, अलीगढ़, मेरठ, कानपुर और प्रयागराज समेत कई मंडलों के जिला अस्पतालों में यह सुविधा शुरू हो चुकी है, जबकि बाकी स्थानों पर इसे अगले माह तक शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए इमरजेंसी विभाग के डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है।