– मधुमेह (डायबिटीज) में आहार चिकित्सा – स्वस्थ जीवन की कुंजी
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। विश्वभर में तेजी से बढ़ रही मधुमेह की समस्या आज एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। इस बीमारी के नियंत्रण और रोकथाम में आहार चिकित्सा की भूमिका सबसे प्रभावी मानी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही भोजन ही मधुमेह का पहला और सबसे महत्वपूर्ण उपचार है। वेब वार्ता के दौरान डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल के चीफ फार्मेसिस्ट सुनील यादव ने इसी विषय पर विस्तार से जानकारी दी।
मधुमेह क्या है
मधुमेह वह स्थिति है जिसमें इंसुलिन हार्मोन की कमी या उसके सही ढंग से काम न करने के कारण रक्त में ग्लूकोज़ का स्तर बढ़ जाता है। लंबे समय तक उच्च रक्त शर्करा बने रहने पर हृदय, किडनी, आंखों और नसों पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है। भोजन में मौजूद कार्बोहाइड्रेट शरीर में ग्लूकोज़ में बदल कर ऊर्जा प्रदान करते हैं और इस ग्लूकोज़ को कोशिकाओं तक पहुँचाने का कार्य इंसुलिन करता है। अग्न्याशय द्वारा निर्मित यह हार्मोन जब कम बनता है या प्रभावी रूप से काम नहीं करता, तब रक्त शर्करा बढ़कर मधुमेह का रूप ले लेता है।
मधुमेह के प्रकार
टाइप-1 मधुमेह में शरीर इंसुलिन बनाना लगभग बंद कर देता है। यह बच्चों और युवाओं में अधिक पाया जाता है और रोगी को जीवनभर इंसुलिन की आवश्यकता रहती है।
टाइप-2 मधुमेह में शरीर इंसुलिन तो बनाता है, पर उसका उपयोग सही ढंग से नहीं कर पाता। मोटापा, निष्क्रिय जीवनशैली, तनाव और असंतुलित भोजन इसके प्रमुख कारण हैं। भारत में अधिकांश मरीज इसी प्रकार के होते हैं।
गर्भावधि मधुमेह गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में होता है। प्रसव के बाद यह सामान्य भी हो सकता है लेकिन आगे चलकर टाइप-2 मधुमेह का खतरा बढ़ा देता है।
आहार चिकित्सा की भूमिका
डायबिटीज में आहार चिकित्सा का मुख्य उद्देश्य रक्त शर्करा को सामान्य रखना, शरीर को सभी आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराना, वजन नियंत्रित रखना और हृदय रोग व उच्च रक्तचाप जैसी जटिलताओं से बचाव करना है।
सुनील यादव ने मधुमेह रोगियों के लिए कुछ महत्वपूर्ण आहार संबंधी सुझाव दिए। उनके अनुसार दिन में दो या तीन भारी भोजन के बजाय पाँच–छह छोटे संतुलित भोजन लेना अधिक उपयुक्त है। भोजन में साबुत अनाज, हरी सब्ज़ियाँ, सलाद और फाइबर युक्त पदार्थ शामिल करना चाहिए। मीठे खाद्य पदार्थ, शक्करयुक्त पेय, मैदा और तले भोजन से बचाव आवश्यक है। घी, मक्खन और तेल का सीमित उपयोग करने की सलाह दी गई। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, धूम्रपान और शराब से दूर रहने तथा नियमित व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया। साथ ही, समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच और डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह का पालन करना जरूरी बताया गया। बार-बार प्यास लगना, वजन तेजी से घटना, बार-बार पेशाब आना, दृष्टि कमजोर होना, घाव का देर से भरना और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
जीवनशैली परिवर्तन ही सर्वोत्तम दवा
आधुनिक जीवनशैली में बदलाव, तनाव प्रबंधन, पर्याप्त नींद और वजन नियंत्रण मधुमेह प्रबंधन में दवाओं जितने ही महत्वपूर्ण हैं। श्री यादव के अनुसार, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और सकारात्मक सोच मधुमेह से बचाव और नियंत्रण के तीन मजबूत स्तंभ हैं। उनका संदेश स्पष्ट है