– देशभर के जनजातीय कलाकारों के संगम से “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को साकार करने की पहल
– 18 राज्यों से लगभग 600 जनजातीय कलाकार देंगे प्रस्तुतियाँ
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। लोकनायक बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाले जनजाति गौरव दिवस के तहत “जनजाति भागीदारी उत्सव” की रूपरेखा आज लोकभवन में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह तथा समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने साझा की।
जयवीर सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति के निर्माण में जनजातीय समुदायों का योगदान अतुलनीय रहा है। बिरसा मुंडा केवल जनजातीय नायक ही नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अमर योद्धा थे। वर्ष 2022 से भारत सरकार ने उनकी जयंती को “जनजाति गौरव दिवस” के रूप में मनाने का निर्णय लेकर उनके योगदान को अमर कर दिया है। उन्होंने बताया कि 13 से 18 नवम्बर 2025 तक लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में राष्ट्रीय जनजाति भागीदारी उत्सव का भव्य आयोजन होगा। इसके अंतर्गत 18 राज्यों से लगभग 600 जनजातीय कलाकार पारंपरिक नृत्य, संगीत और वाद्य प्रस्तुतियों के माध्यम से सांस्कृतिक एकता का संदेश देंगे। इस आयोजन में अरुणाचल प्रदेश भागीदार राज्य के रूप में शामिल रहेगा।
श्री सिंह ने कहा कि यह उत्सव केवल सांस्कृतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारत की सामासिक संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। इसमें जनजातीय कला, हस्तशिल्प, हथकरघा, व्यंजन, लोककला और आभूषणों की प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र होंगी। जनजातीय समाज की प्रकृति-निष्ठ जीवनशैली, सामुदायिक सहयोग और आत्मनिर्भरता इस आयोजन की आत्मा होंगे।
समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने बताया कि 15 नवम्बर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोनभद्र में आयोजित जनजातीय कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे, जहाँ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वर्चुअल रूप से जुड़ेंगे। उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल जनजातीय गौरव का प्रतीक होगा, बल्कि उनके आर्थिक सशक्तिकरण, सामाजिक भागीदारी और सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा।
उत्सव के दौरान पारंपरिक खेल, लोककला कार्यशालाएँ, फोक टेल्स सत्र, वन उत्पाद प्रदर्शन और क्षेत्रीय व्यंजन प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की जाएँगी। मंत्रीद्वय ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस “जनजाति भागीदारी उत्सव” में बड़ी संख्या में भाग लेकर जनजातीय एकता और सांस्कृतिक विविधता, जनजातीय गौरव, भाषाई विविधता के इस पर्व को सफल बनाएं। इसके अतिरिक्त, जनजातीय युवाओं की भागीदारी से आधुनिकता और परंपरा का समन्वय प्रस्तुत किया जाएगा।
इस मौके पर निदेशक समाज कल्याण, कुमार प्रशांत, निदेशक, लोककला जनजाति संस्कृति संस्थान अतुल द्विवेदी तथा संस्कृति एवं समाज कल्याण विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद थे।
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