वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। भारत में अब घरों की छतें न केवल बारिश, बल्कि सूरज की रोशनी भी सहेज रही हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना (PMSGY) ने देश में रेजिडेंशियल रूफटॉप सोलर सेक्टर को नई गति दी है। योजना के लॉन्च के एक वर्ष के भीतर 4,946 मेगावॉट क्षमता स्थापित की जा चुकी है और अब तक 9,280 करोड़ रुपये की सब्सिडी वितरित की जा चुकी है।
IEEFA और JMK Research की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2025 तक 57.9 लाख घरों ने सोलर सिस्टम के लिए आवेदन किया, जो मार्च 2024 की तुलना में चार गुना अधिक है। हालांकि, 1 करोड़ इंस्टॉलेशन के लक्ष्य का अभी केवल 13.1 प्रतिशत ही पूरा हुआ है। गुजरात और केरल इस दिशा में सबसे आगे हैं, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर औसत इंस्टॉलेशन अनुपात 22.7 प्रतिशत ही है।
असम, दिल्ली, गोवा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों ने भी अतिरिक्त पूंजी सब्सिडी देकर पहल की है, पर कम जागरूकता, जटिल लोन प्रक्रिया और तकनीकी गड़बड़ियाँ अभी भी बाधक हैं। रिपोर्ट बताती है कि कई उपभोक्ता अब भी सोलर को महंगा और जटिल मानते हैं। इसी के समाधान के लिए तीन लाख से अधिक लोगों को सोलर सेक्टर में प्रशिक्षण दिया गया है।
सरकार ने घरेलू सोलर मॉड्यूल के उपयोग को अनिवार्य किया है और नवाचार प्रोजेक्ट्स के लिए 60 प्रतिशत तक की ग्रांट देने का प्रावधान किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि राज्यों को स्पष्ट लक्ष्य तय करने होंगे और शिकायत निवारण व्यवस्था को मज़बूत बनाना होगा।
सूर्य घर योजना ने नई उम्मीद जगाई है, पर 2027 तक 30GW लक्ष्य हासिल करने के लिए सब्सिडी से आगे बढ़कर डिजिटल पारदर्शिता और उपभोक्ता भरोसा सुनिश्चित करना होगा।