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योगी आदित्यनाथ ने किया ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश विजन 2047’ कार्यशाला का शुभारंभ

– विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश हमारे पूर्वजों के लिए सबसे बड़ी श्रद्धांजलि : मुख्यमंत्री
– देश के कुल इलेक्ट्रॉनिक कम्पोनेण्ट तथा मोबाइल निर्माण में उ0प्र0 का 60 से 65 फीसदी योगदान
– उ0प्र0 वर्ष 2029-30 तक अपनी अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर बनाने की दिशा में अग्रसर
वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/ अजय कुमार
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर में ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश विजन 2047’ विषयक कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए कहा कि पितृ विसर्जन का पावन पर्व हमें अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर आयोजित कार्यशाला में कृषि, पशुधन संरक्षण, औद्योगिक विकास, आईटी एवं इमर्जिंग टेक्नोलॉजी, पर्यटन, नगर एवं ग्राम्य विकास, समाज कल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा और सेवा एवं सुशासन जैसे विभिन्न सेक्टरों के स्टॉलों का निरीक्षण किया गया। इसमें प्रबुद्धजन, शिक्षकों, चिकित्सकों, अधिवक्ताओं, वास्तुकारों, अभियंताओं और उद्योगपतियों की सहभागिता रही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने देश की आजादी के लिए अपने जीवन का समर्पण किया और उनका सपना था कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बने। प्रदेश की वर्तमान पीढ़ी को विकसित और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की संकल्पना से अवगत कराना जारी है। इसके लिए विशेषज्ञों की टीमों द्वारा प्रदेश की 110 से अधिक अकादमिक संस्थाओं और विश्वविद्यालयों में युवाओं से संवाद किया जा चुका है। उन्होंने ‘समर्थ उत्तर प्रदेश’ पोर्टल पर सभी नागरिकों से सुझाव देने का आग्रह किया और सर्वश्रेष्ठ सुझावों को सम्मानित करने की प्रक्रिया की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने पंचप्रण और नौ संकल्पों के महत्व पर भी प्रकाश डाला, जिसमें जल एवं पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और समाज सेवा जैसे विषय शामिल हैं। उन्होंने नेचुरल फार्मिंग, स्वस्थ जीवनशैली, खेलकूद और सामाजिक सेवा को विकसित भारत की आधारशिला मानते हुए युवाओं से इन क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि योग्य भूमि, जल संसाधन और युवाओं की बड़ी आबादी के मामले में अत्यंत समृद्ध है। प्रदेश सरकार ने ‘एक जनपद, एक उत्पाद योजना’ तथा ओडीओपी के तहत स्थानीय उद्योगों और हस्तशिल्प को पुनर्जीवित किया है। एक्सप्रेस-वे, मेट्रो रेल, एयरपोर्ट, इनलैंड वॉटरवे और डिजिटल टेक्नोलॉजी में राज्य का बड़ा योगदान है। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में भी हाल के वर्षों में हुए सुधारों और डिजिटल शिक्षा, वर्चुअल ICU तथा अभ्युदय कोचिंग जैसी पहल की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 2029-30 तक एक ट्रिलियन डॉलर, 2035 तक तीन ट्रिलियन और 2046-47 तक छह ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इसके लिए प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लिए विकसित उत्तर प्रदेश की नींव रखना होगा और इसके लिए युवाओं, किसानों, शिक्षकों और चिकित्सकों के बहुमूल्य सुझाव विजन डॉक्यूमेंट में समाहित किए जाएंगे। इस अवसर पर जनपद के प्रभारी/जल शक्ति विभाग मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, महापौर डॉ0 मंगलेश श्रीवास्तव, विद्यायक महेन्द्र पाल सिंह सहित कुलपतिगण, विभिन्न जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारीगण, प्रबुद्धजन, शिक्षकों, चिकित्सक, अधिवक्ता वास्तुकार, अभियन्ता एवं उद्योगपति सहित विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहीं।

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