– महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में रचा गया इतिहास
वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/ अजय कुमार
नई दिल्ली। राष्ट्रपति भवन का प्रांगण बुधवार को एक ऐतिहासिक दृश्य का साक्षी बना, जब उत्तर प्रदेश की आकांक्षा समिति के अंतर्गत कार्यरत “मसाला मठरी केंद्र” की मेहनतकश महिलाओं, जिन्हें सम्मानपूर्वक ‘दीदी’ कहा जाता है, ने भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू से भेंट की। यह अवसर न केवल उनके जीवन का सबसे गौरवपूर्ण क्षण था, बल्कि महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक नई प्रेरणा भी बन गया।
लखनऊ स्थित मसाला मठरी केंद्र की दीदियाँ, जो घरेलू उद्योग के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में कार्यरत हैं, राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित की गईं। उनकी यह ऐतिहासिक यात्रा आकांक्षा समिति की अध्यक्ष एवं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. रश्मि सिंह के नेतृत्व और प्रयासों से संभव हुई।
महामहिम राष्ट्रपति ने इन महिलाओं से आत्मीयता से संवाद करते हुए उनकी आय, स्वास्थ्य, बच्चों की शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा की। उन्होंने कहा कि “आर्थिक आत्मनिर्भरता ही महिलाओं के सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम है” और आकांक्षा जैसी पहल को उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जनपद में सक्रिय किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों की पत्नियाँ यदि समाज सेवा को अपनाएं, तो वे वंचित वर्गों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं। यह विचार आकांक्षा समिति की भावना को और अधिक सशक्त करता है। इस अवसर पर डॉ. रश्मि सिंह ने अपने कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों का एक संकलन राष्ट्रपति को भेंट किया और समिति की आगामी योजनाओं की जानकारी दी। साथ में संस्था की सचिव प्रतिभा सिंह और उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति चौधरी भी उपस्थित रहीं।
डॉ. रश्मि सिंह ने ने बताया कि राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू का मार्गदर्शन, विनम्रता और संवेदनशीलता ने आकांक्षा दीदियों को अत्यधिक प्रेरित किया। यह भेंट महिलाओं के लिए केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि सामाजिक स्वीकृति और आत्मविश्वास का प्रतीक बन गई।