वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार वर्मा
रामराजातल्ला/ हावडा। गोध्वज स्थापना भारत यात्रा के १२वें दिन आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को पश्चिम बंगाल के प्रमुख महानगर हावडा के अति प्राचीन शंकरमठ में विधिविधान से पूजा करने के बाद ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्दः के कर कमलों से “गोप्रतिष्ठा ध्वज” को स्थापित किया गया।
ध्यातव्य हो कि शंकराचार्य गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराने के लिए पिछले २२ सितम्बर २०२४ को अयोध्या धाम में पहुंचकर रामकोट की परिक्रमा कर इस यात्रा की शुरुआत की थी, ये ऐतिहासिक यात्रा पूर्वोत्तर के प्रायः सभी राज्यों में जाकर गोप्रतिष्ठा ध्वज की स्थापना कर चुकी। इस ऐतिहासिक यात्रा को विगत दिनों तब एक बडी सफलता मिली जब शंकराचार्य के निर्देश पर महाराष्ट्र सरकार के मुख्यमंत्री एकनाथ सम्भाजी शिन्दे ने देसी (रामा) गाय को राज्यमाता घोषित करके केबिनेट की प्रस्ताव की कापी शंकराचार्य जी के चरणों में सौंपा।
शंकराचार्य इस ऐतिहासिक यात्रा के माध्यम से भारत भूमि की ऊपर से सम्पूर्णतया गौहत्या का कलंक मिटाकर गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराने के लिए कृतसंकल्प है। शक्तिपूजा की भूमि पश्चिमबंगाल में नवरात्रि के पहले दिन शंकर मठ में गोप्रतिष्ठा ध्वज की स्थापना करके अपने को दृढसंकल्पित किया। सम्बोधित करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि गो गंगा कृपाकांक्षी गोपालमणि का ये आन्दोलन अत्यन्त पवित्र है, इसलिए इस आन्दोलन को बल देने के लिए हम इस अभियान में लगे हुए हैं । शंकराचार्य ने कहा कि गाय को दूध समझने वाले और गाय को मांस समझने वाले दोनों ही गाय के महत्व से अनभिज्ञ है , भगवद्गीता में भगवान कहते हैं कि हमारे साथ भगवान ने यज्ञ को प्रकट किया और हम परस्पर एक दूसरे के लिए बनाए गए हैं। मंत्र और हवि के द्वारा यज्ञ होता है जिससे देवता प्रसन्न होते हैं। ब्राह्मण और गोमाता ही यज्ञ को सम्पन्न कराते हैं। बिना गाय के सारी पूजा उपासना व्यर्थ है, ३३ कोटि देवता की सेवा ही गौसेवा ह । पहली रोटी हम अपने ३३कोटि देव स्वरूपा गोमाता को समर्पित करते हैं। भगवान को पाना है तो गोसेवा करो, भगवान ने कह रखा है – ‘गवां मध्ये वसाम्यहम्’ मैं सदा गायों के बीच में ही रहता हूं।
मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि यह यात्रा हावडा से झारखंड प्रदेश जमशेदपुर पहुंचेगी । षनिवार कोे राजधानी रांची में गोप्रतिष्ठा ध्वज स्थापित की जाएगी ।