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पुलिस ने कारण बताए बिना ही शंकराचार्य को ज्ञानवापी जाने से रोका

– सौ करोड़ सनातनधर्मियों का इससे बड़ा और क्या अपमान होगा?

वेबवार्ता (न्यूज एजेंसी)/ अजय कुमार वर्मा
वाराणसी। एसएसआई की सर्वे रिपोर्ट में ज्ञानपवापी में मूल विश्वनाथ मंदिर के प्रमाण मिल जाने के बाद उस स्थान की परिक्रमा करने जा रहे  ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती ‘1008’ जी महाराज को पुलिस ने जबरन रोक दिया। शंकराचार्य महाराज सोमवार को पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्या मठ से ज्ञानवापी जाना चाहते थे लेकिन पूरे मठ को ही पुलिस के जवानों ने घेर लिया था।
ज्ञातव्य है कि 27 जनवरी को काशी पधारे पूज्यपाद शंकराचार्य जी महाराज ने मूल विश्वनाथ के परिक्रमा की इच्छा प्रकट की थी।आज सुबह से ही प्रशासन ने भारी पुलिसकर्मियों के घेराबंदी कर और अवरोध लगाकर श्रीविद्यामठ को चारो तरफ से घेर लिया था। अपने संकल्प के अनुसार सोमवार को जब पूज्यपाद शंकराचार्य जी महाराज श्रीविद्यामठ से मूल विश्वनाथ जाने के लिए तैयार हुए तो प्रशासन ने महिला पुलिसकर्मियों को आगे कर शंकराचार्य का रास्ता रोक दिया। जिसपर मठ में मौजूद मातृशक्तियों ने महिला पुलिस कर्मियों से काफी प्रतिवाद किया। मठ के पूर्वी द्वार पर ही पुलिस के अधिकारियों ने यह कहते हुए उन्हें रोक दिया कि आप ज्ञानवापी नहीं जा सकते। ज्ञानवापी की परिक्रमा करने की किसी नई परंपरा की शुरुआत नहीं होने दी जाएगी। इस पर शंकराचार्य ने कहा कि ज्ञानवापी की परिक्रमा उनके द्वारा पहली बार नहीं की जा रही है। पूर्व में भी मैं ज्ञानवापी जाता रहा हूं। यही नहीं हमारे पूर्व आचार्य भी समय समय पर ज्ञानवापी की परिक्रमा करते रहे हैं। इसके कई प्रमाण भी हमारे पास हैं।
शंकराचार्य ने वहां उपस्थित प्रशासन के प्रतिनिधि एसीपी भेलूपुर एवं दशाश्वमेध से पूछा हमें क्यों रोका जा रहा है जब हम नियम के अंतर्गत मूल विश्वनाथ की परिक्रमा करना चाह रहे हैं? इसका जबाब देते हुए एसीपी भेलूपुर ने कहा कि महाराज जी ऊपर से आदेश है आपको परिक्रमा करने की अनुमति नही है। शंकराचार्य महाराज के पूछने पर कि अनुमति क्यों नही है? तो एसीपी भेलूपुर ने कहा कि बस आपको अनुमति नहीं है इसलिए हम आपको हम विन्रमता पूर्वक जाने नही देंगे। शंकराचार्य महाराज ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि यदि आप धारा 144 के कारण मुझे वहां जाने से रोक रहे हैं तो मैं आप को विश्वास दिलाता हूं कि सिर्फ हम दो लोग ही ज्ञानवापी जाएंगे। ऐसा करने पर न तो कानून का उल्लंघन होगा और न ही कानून व्यवस्था को किसी प्रकार का खतरा होगा। मैं स्वयं पुलिस और प्रशासन का सहयोग करना चाहता हूं। बावजूद इसके पुलिस अधिकारी यह कहते रहे कि जहां आप परिक्रमा करना चाहते हैं वह प्रतिबंधित क्षेत्र है। आप को वहां जाने की अनुमति नहीं है।

इसके उपरांत शंकराचार्य की ओर से ज्ञानवापी की परिक्रमा करने की अनुमति के लिए तत्काल एक पत्र अधिकारियों को दिया गया। अधिकारियों ने पत्र तो ले लिया लेकिन अनुमति नहीं दी। जबकि इससे पूर्व शंकराचार्य कार्यालय की ओर से पुलिस-प्रशासन को पत्र भेज कर अवगत कराया गया था कि 29 जनवरी को अपराह्न साढ़े तीन बजे वह ज्ञानवापी स्थित मूल विश्वनाथ मंदिर की परिक्रमा करने जाएंगे। शंकराचार्य कार्यालय की ओर से पत्र मिलने के बाद 28 जनवरी को ही पुलिस के कुछ वरिष्ठ अधिकारी श्रीविद्या मठ पहुंचे थे। शंकराचार्य से बातचीत में उन्होंने वहां धारा 144 लागू होने की बात कही थी। उस वक्त भी शंकराचार्य ने यह प्रस्ताव दिया था कि यदि ऐसी बात है तो मैं अपने एक शिष्य के साथ ही परिक्रम कर लूंगा। तब भी अधिकारी कुछ भी स्पष्ट किए बिना ही मठ से लौट गए थे।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती ने कहा कि ए.एस.आई. के रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो गया है कि ज्ञानवापी स्थित प्रांगण में मूल विश्वनाथ विराजे हैं। हम सनातनधर्मियों के सर्वोच्च प्रतिनिधि होने के नाते और स्वयं सनातनधर्मी होने के नाते मूल विश्वनाथ मंदिर की परिक्रमा कर उनको प्रणाम करना चाहते हैं। हम यह परिक्रमा प्रतिबंधित क्षेत्र के बाहर से ही करना चाहते हैं। जहां से आमजन का आवागमन हो रहा है। हम सनातनधर्मियों के सर्वोच्च धर्मगुरु हैं। प्रशासन धारा 144 का हवाला दे कर हमको रोक रहा है। वहीं मुस्लिम पक्ष के सैकड़ों लोग प्रतिदिन वहां पर नमाज पढ़ रहे हैं उनके लिए धारा 144 नहीं है और हम कानून का पालन करते हुए केवल दो लोगों के साथ अपने आराध्य मूल विश्वनाथ की परिक्रमा करना चाह रहे हैं तो हमें अनुमति नहीं दी जा रही है। सौ करोड़ सनातनधर्मियों का इससे बड़ा और क्या अपमान होगा? डेढ़ वर्ष से मुकदमा चल रहा है और इस दौरान मूल विश्वनाथ को पूजा, राग-भोग से वंचित कर दिया गया है। जबकि यही स्थित अयोध्या में थी। वहां भी मुकदमा चल रहा था लेकिन वहां रामलला का निरन्तर पूजा, राग-भोग सुनिश्चित किया जाता था।

शंकराचार्य  ने उपस्थित मीडिया बन्धुओं से कहा कि मा. उच्च न्यायालय के आदेश में यह कहा गया है कि उक्त स्थल मन्दिर है अथवा मस्जिद इसका निर्णय न्यायालय करेगा। अभी तक यह निर्धारित नहीं हुआ है कि उक्त स्थल हिन्दुओं का है अथवा मुस्लिमों का लेकिन प्रशासन द्वारा हम सनातनधर्मियों के धार्मिक एवं मौलिक अधिकारों का हनन करते हुए हमें रोक रहा है।

 

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