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पीएम ने ‘प्राकृतिक खेती-राष्ट्रीय सम्मेलन’ द्वारा पारम्परिक खेती को पुनर्जीवित करने का अभियान शुरू किया

वेबवार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार वर्मा
लखनऊ 16 दिसम्बर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के माध्यम से ‘प्राकृतिक खेती-राष्ट्रीय सम्मेलन’ के समापन सत्र को सम्बोधित किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने सरकारी आवास से वर्चुअल माध्यम से इस कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। यह सम्मेलन आणंद, गुजरात मंे आयोजित किया गया।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक कृषि पर आधारित यह राष्ट्रीय सम्मेलन देश में कृषि सेक्टर, खेती किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। इस सम्मेलन से 08 करोड़ से अधिक किसान तकनीकी माध्यम से देश के हर कोने से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती पर आधारित यह सम्मेलन कृषि के विभिन्न आयाम, फूड प्रोसेसिंग, नैचुरल फार्मिंग इत्यादि विषय पर 21वीं सदी में भारतीय कृषि का कायाकल्प करने में सहायक सिद्ध होगा। प्राकृतिक खेती से जुड़े इस प्राचीन ज्ञान को हमें न सिर्फ सीखने की जरुरत है, बल्कि आधुनिक समय में तराशने की जरूरत है। इस दिशा में हमें नए सिरे से शोध करने होंगे। प्राचीन ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक फ्रेम में ढालना होगा। उन्हांेने देश के हर राज्य एवं राज्य सरकार आग्रह किया कि वो प्राकृतिक खेती को जनआंदोलन बनाने के लिए आगे आएं। इस अमृत महोत्सव वर्ष में हर पंचायत का कम से कम एक गांव प्राकृतिक खेती से अवश्य जुड़े।
अपने सम्बोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि इस संगोष्ठी का आयोजन प्राकृतिक खेती के प्रयोग को बढ़ावा देने और किसानों को इससे होने वाले लाभों की जानकारी देने के लिए किया गया है। प्रधानमंत्री इस संगोष्ठी के प्रेरणा स्रोत हैं। देश में किसान प्राकृतिक खेती को अपनाएं इसलिए प्रधानमंत्री ने इस मुहिम को गति देने का निश्चय करते हुए अपील भी की है। इसी का परिणाम है कि देश भर में लाखों किसान आज धीरे-धीरे प्राकृतिक खेती को अपना रहे हैं। इसके लाभों को देखकर अनेक किसान इसके प्रयोग को आगे बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने सालों पुरानी हमारी पारम्परिक और प्राकृतिक खेती को पुनर्जीवित करने का एक बहुत बड़ा अभियान शुरू किया है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हाल ही में भारत सरकार ने सहकारिता मंत्रालय की स्थापना का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। सहकारिता के माध्यम से फाइनेंस और मछली पालन सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्य हो रहे हैं। इससे छोटे किसानों को लाभ के साथ-साथ उनका सशक्तीकरण भी होगा। देश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिले और ज्यादा से ज्यादा किसान इसे अपनाएं, इसके लिए यह बहुत जरूरी है कि उन्हें ऑर्गेनिक फूड प्रोडक्ट का उचित दाम मिले।

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