वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। योगी सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश की जेल व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने पर विशेष जोर दिया है। इस अवधि में जेलों के इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिकीकरण और नई तकनीक के विकास पर 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। इसमें सबसे अधिक धनराशि जेलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर खर्च हुई है।
डीजी, कारागार एवं सुधार सेवाएं पीसी मीना ने बताया कि सरकार के प्रयासों से जेलों में बंदियों की क्षमता बढ़ाने के साथ सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को भी आधुनिक बनाया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में जेल विभाग का बजट 913.07 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2026-27 में बढ़कर 2,877.58 करोड़ रुपये हो गया। इस तरह करीब साढ़े नौ वर्षों में बजट में 215 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2021-22 के बीच जेल विभाग के लिए 5,494.41 करोड़ रुपये का बजट आवंटित हुआ था। वहीं, वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक यह राशि बढ़कर 11,913.53 करोड़ रुपये हो गई। सरकार के अनुसार यह वृद्धि जेलों के विकास और आधुनिकीकरण को दी जा रही प्राथमिकता को दर्शाती है।
नई जेलों के निर्माण के साथ बंदी क्षमता विस्तार पर भी काम चल रहा है। अमेठी में 176.12 करोड़, महोबा में 203.42 करोड़, हाथरस में 184.94 करोड़, कुशीनगर में 228.31 करोड़, जौनपुर में 179.79 करोड़ और हापुड़ में 190.08 करोड़ रुपये की लागत से जिला कारागारों का निर्माण कराया जा रहा है।
इसके अलावा संभल, शामली, बलिया, सहारनपुर, अमरोहा और चंदौली में प्रस्तावित जेलों के लिए भूमि खरीद को भी मंजूरी दी गई है।