वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। योगी सरकार ने बच्चों को गंभीर दुर्घटनाओं और चोटों के बाद समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में पीडियाट्रिक ट्रॉमा केयर को मौजूदा इमरजेंसी स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने का रोडमैप तैयार कर लिया है। गंभीर दुर्घटनाओं और चोटों से जूझने वाले बच्चों को समय पर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में पीडियाट्रिक ट्रॉमा केयर को मौजूदा इमरजेंसी स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है। सरकार ने करीब छह करोड़ बच्चों के लिए हाई-लेवल और कम लागत वाला एकीकृत ट्रॉमा केयर मॉडल विकसित करने का रोडमैप तैयार किया है। इसके माध्यम से हर साल करीब 1,800 बच्चों की जान बचाने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रस्तावित व्यवस्था में अस्पतालों, इमरजेंसी सेवाओं, एंबुलेंस, विशेषज्ञ चिकित्सकों और रेफरल सिस्टम को एक साझा नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। दुर्घटना स्थल से प्राथमिक उपचार, ट्रॉमा सेंटर, विशेषज्ञ चिकित्सा और आगे की देखभाल तक इलाज को समयबद्ध और समन्वित बनाने पर जोर रहेगा। इसका उद्देश्य गंभीर रूप से घायल बच्चों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल रेफर करने में लगने वाले अतिरिक्त समय को कम करना है। ट्रॉमा बेड की हिस्सेदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। वर्तमान में इमरजेंसी विभागों में ट्रॉमा बेड की हिस्सेदारी करीब तीन से पांच प्रतिशत बताई गई है, जिसे एकीकृत व्यवस्था के तहत 12 से 15 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है। योजना के तहत लेवल-1 का एक, लेवल-2 के 36 और लेवल-3 के 126 इंटीग्रेटेड ट्रॉमा एवं इमरजेंसी यूनिट विकसित किए जाएंगे। इस तरह 173 इंटरकनेक्टेड सुविधाओं के साथ करीब 2,853 नए बेड जोड़ने की योजना है।
पीडियाट्रिक ट्रॉमा में ‘गोल्डन ऑवर’ को महत्वपूर्ण मानते हुए दुर्घटना के तुरंत बाद उपचार, प्रशिक्षित मेडिकल टीम, एंबुलेंस कनेक्टिविटी और उपयुक्त ट्रॉमा सेंटर तक त्वरित रेफरल को एकीकृत किया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था पर करीब 45 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना है।