वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ और राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे ने शनिवार को संयुक्त प्रेस वार्ता कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर गंभीर सवाल उठाए। कांग्रेस नेताओं ने आयोग में कथित असहमति और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का मुद्दा भी उठाया।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि दो मार्च 2023 को सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने वाली समिति की व्यवस्था दी थी। कांग्रेस के अनुसार, दिसंबर 2023 में बने नए कानून में मुख्य न्यायाधीश की जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को चयन समिति में शामिल किया गया। फरवरी 2025 में ज्ञानेश कुमार की मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्ति पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने असहमति नोट दिया था।
प्रेस वार्ता में दावा किया गया कि पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। इनमें मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण और आइटी प्रणाली से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए। कांग्रेस ने फॉर्म-6 में किए गए बदलाव पर भी सवाल उठाया और कहा कि एक चुनाव आयुक्त ने इसे अनधिकृत और अवैध बताते हुए हटाने की मांग की थी।
एसआईआर को लेकर कांग्रेस ने कहा कि तीन चरणों में 26 राज्य और छह केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं तथा पार्टी के अनुसार बड़ी संख्या में नाम हटाए गए और मतदाताओं से अतिरिक्त दस्तावेज मांगे गए हैं। नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया कानून, पारदर्शिता और उचित प्रक्रिया के अनुरूप होनी चाहिए।
प्रेस वार्ता में प्रदेश कांग्रेस कमेटी मीडिया विभाग के चेयरमैन कुंवर सिंह निषाद और मीडिया कोआर्डिनेटर पूर्वी जोन पुनीत पाठक भी मौजूद रहे।