वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर लखनऊ विश्वविद्यालय में बुधवार को “उम्मीद : बियॉन्ड द साइलेंस” विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। मनोविज्ञान विभाग की काउंसलिंग एंड गाइडेंस सेल, साइकी हब क्लब और हैप्पी थिंकिंग लैबोरेटरी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करने और भावनात्मक परेशानी में समय पर मदद लेने के लिए प्रेरित किया गया।
मनोविज्ञान विभाग के सभागार में फिल्म ‘छिछोरे’ के चुनिंदा अंश दिखाए गए। इसके बाद विद्यार्थियों के साथ शैक्षणिक और सामाजिक दबाव, असफलता, कठिन परिस्थितियों से उबरने की क्षमता तथा भावनात्मक परेशानियों जैसे विषयों पर संवाद हुआ। विद्यार्थियों को बताया गया कि असफलता या कठिन परिस्थितियां किसी व्यक्ति का मूल्य तय नहीं करतीं और मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि साहस का परिचायक है।
प्राण फाउंडेशन के विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से आत्महत्या की रोकथाम का संदेश दिया। इसमें भावनात्मक परेशानी के संकेत पहचानने, बिना पूर्वाग्रह बात सुनने और जरूरतमंद व्यक्ति को समय पर सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
प्रो. अर्चना शुक्ला ने विद्यार्थियों से चुनौतियों का साहस के साथ सामना करने और कठिन दौर में उम्मीद बनाए रखने का आह्वान किया। डॉ. मानिनी श्रीवास्तव ने करुणा की श्रृंखला बनाने और भावनात्मक उथल-पुथल से गुजर रहे लोगों की मदद के लिए आगे आने की अपील की। पुराने परिसर में “द ट्री ऑफ होप” गतिविधि के दौरान विद्यार्थियों ने पत्तियों पर जीवन को सुंदर और सार्थक बनाने वाले संदेश लिखे। वहीं “मिस्ट्री बॉक्स” के जरिये विद्यार्थियों को अपनी चिंताएं गुमनाम रूप से साझा करने का अवसर मिला। जागरूकता पुस्तिकाओं में भावनात्मक परेशानी के संकेत, सहायता के तरीके और हेल्पलाइन की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. मानिनी श्रीवास्तव ने किया।