वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में ब्लड कैंसर से पीड़ित शैलेश दुबे की मौत के बाद क्रिटिकल केयर व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं। परिजनों का आरोप है कि हालत गंभीर होने के बावजूद मरीज को समय पर वेंटिलेटर सपोर्ट नहीं मिल सका। हेमेटोलॉजी विभाग से लेकर पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर विभाग तक भर्ती के प्रयास किए गए, लेकिन उन्हें जगह नहीं मिल सकी। परिजनों का कहना है कि समय पर वेंटिलेटर और क्रिटिकल केयर सपोर्ट मिल जाता तो शायद मरीज की जान बच सकती थी।
परिजनों के अनुसार शैलेश दुबे हेमेटोलॉजी विभाग में भर्ती थे। दो दिन पहले रात में अचानक उनकी हालत बिगड़ गई। उन्हें सांस लेने में परेशानी बढ़ने लगी और वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता बताई गई। आरोप है कि विभाग में उपलब्ध व्यवस्था के बावजूद उन्हें समय पर वेंटिलेटर पर नहीं लिया जा सका।
जूनियर डॉक्टरों ने बताई तकनीकी दिक्कत :
परिजनों का दावा है कि ड्यूटी पर मौजूद जूनियर डॉक्टरों ने वेंटिलेटर लगाने में तकनीकी दिक्कत होने की बात कही। इसके बाद मरीज को पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर विभाग में भर्ती कराने का प्रयास किया गया, लेकिन वहां भी बेड उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई। गंभीर हालत में मरीज की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल की क्रिटिकल केयर व्यवस्था और गंभीर मरीजों को तत्काल वेंटिलेटर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, वेंटिलेटर उपलब्ध न होने और तकनीकी दिक्कत संबंधी आरोपों पर केजीएमयू प्रशासन का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।