वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। नकली और संदिग्ध दवाओं की सप्लाई चेन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने अमीनाबाद में बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। बिना वास्तविक दवा की आपूर्ति किए करोड़ों रुपये की फर्जी बिलिंग, क्रॉस-बिलिंग और कागजी लेनदेन के मामले में चार आरोपितों के खिलाफ अमीनाबाद थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
एफएसडीए के अनुसार हेल्थ प्लस, एमके फार्मा, राम फार्मा और सहारनपुर की पैशन्ट केयर सर्जिकल हाउस के बीच कागजों पर दवाओं की खरीद-बिक्री दिखाई गई। जांच में आरोप है कि बंद पड़ी फर्म का इस्तेमाल भी फर्जी खरीद और बिलिंग के लिए किया गया। हेल्थ प्लस के प्रोपराइटर अंकुर अवस्थी, एमके फार्मा के संचालक मनीष बाजपेयी, राम फार्मा के संचालक गोविंद शुक्ला और पैशन्ट केयर सर्जिकल हाउस के संचालक ऐजाज अहमद को आरोपित बनाया गया है। जांच में एमके फार्मा की ओर से वित्तीय वर्ष 2026 में करीब 8.87 करोड़ रुपये की दवाओं की खरीद दर्शाने की बात सामने आई। इसमें Zoryl M1, Augmentin और Dexorange Syrup जैसी दवाओं के बिल मिले। निर्माताओं से सत्यापन कराने पर संबंधित बिक्री से इनकार किया गया और बैचों को काउंटरफिट बताया गया। विभाग का दावा है कि 39.20 लाख Zoryl M1 टैबलेट का भी हिसाब नहीं मिला है। साक्ष्य छिपाने के लिए लैपटॉप का पुराना डेटा डिलीट किए जाने की बात भी जांच में सामने आई।
एफएसडीए के मुताबिक बिना लाइसेंस दवाओं के भंडारण और लेनदेन, फर्जी रिकॉर्ड, कूटरचना और नकली दवाओं के कारोबार की आशंका की जांच जारी है। आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के निर्देश पर बीएनएस की विभिन्न धाराओं में कार्रवाई की गई है। विभाग अब नेटवर्क के अंतरराज्यीय कनेक्शन, एजेंटों और अन्य फर्मों की भूमिका की भी पड़ताल कर रहा है। दोषी मिलने पर लाइसेंस निरस्त करने के साथ आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।