वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। योगी सरकार ने राजधानी लखनऊ में गोमती नदी को सीवेज प्रदूषण से मुक्त करने की कवायद तेज कर दी है। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत गोमती के पुनरुद्धार के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। ड्रोन सर्वे में नदी में गिरने वाले 12 नए नालों की पहचान होने के बाद अब कुल 45 नालों से पहुंच रहे सीवेज को रोकने की कार्रवाई होगी। नालों की टैपिंग कर सीवेज को एसटीपी तक पहुंचाने और शोधन के बाद ही नदी में प्रवाहित करने की योजना बनाई गई है।
लखनऊ में वर्ष 2026 की अनुमानित आबादी 45.56 लाख है। करीब 7.52 लाख घरों में से 4.01 लाख यानी 53.32 प्रतिशत घर ही सीवरेज नेटवर्क से जुड़े हैं। शहर में करीब 880.70 एमएलडी सीवेज डिस्चार्ज होता है, जबकि 10 एसटीपी की कुल क्षमता 629.5 एमएलडी है। ऐसे में सीवेज प्रबंधन को मजबूत करना जरूरी है। ड्रोन सर्वे में सामने आए 45 नालों में 12 से करीब 75 एमएलडी डिस्चार्ज टैप किया जा चुका है। पांच नालों में टैपिंग की जरूरत नहीं मिली, जबकि 28 नालों से करीब 260 एमएलडी डिस्चार्ज हो रहा है। इन्हें विभिन्न एसटीपी से जोड़ने की योजना है।
प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट (पीएफआर) में 160 एमएलडी बसंतकुंज, 150 एमएलडी जियामऊ, 65 एमएलडी वजीरगंज और 65 एमएलडी नीलमथा की ओर सीवेज डायवर्जन का प्रस्ताव है। पीपराघाट और घैला में मॉड्यूलर एसटीपी तथा मस्तेमऊ नाले पर नेचर बेस्ड तकनीक अपनाने की योजना है। भरवारा और दौलतगंज एसटीपी को भी अपग्रेड किया जाएगा। पीएफआर एनएमसीजी को भेजी जा चुकी है।