वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा में साइबर अपराधियों ने ठगी का ऐसा जाल बिछाया, जिसने सबको चौंका दिया। ठगों ने खुद को CBI और दिल्ली पुलिस अधिकारी बताकर एक रिटायर्ड शिक्षक को फर्जी ड्रग्स केस में फँसाने की धमकी दी और उन्हें डिजिटल रूप से “अरेस्ट” कर 36 लाख रुपये ठग लिए। सौभाग्य से बैंक मैनेजर की सतर्कता और पुलिस की त्वरित कार्रवाई से पूरी रकम वापस मिल गई और पीड़ित की जान भी बच गई।
घटना शहर कोतवाली क्षेत्र की है, जहाँ रिटायर्ड शिक्षक रुद्र प्रसाद को एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को CBI अधिकारी बताया और कहा कि उनके नाम से एक पार्सल में ड्रग्स मिला है। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिये ठगों ने फर्जी थाने और कोर्ट के दृश्य दिखाकर शिक्षक को भयभीत किया। उन्होंने कहा कि अब उनके बैंक खातों की जाँच RBI करेगी, इसलिए उन्हें अपनी पूरी रकम “जाँच खातों” में जमा करनी होगी। भय और भ्रम के माहौल में शिक्षक ने ठगों के बताए खातों में 36 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसी दौरान बैंक मैनेजर को बड़े ट्रांजैक्शन पर संदेह हुआ और उन्होंने पुलिस को सूचित किया। बांदा पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए बैंक के सहयोग से ट्रांजैक्शन रोक दिया और पूरी राशि शिक्षक को वापस दिलाई।
एएसपी शिवराज ने बताया कि “यह मामला गंभीर साइबर ठगी का उदाहरण है। हमने तुरंत कार्रवाई की और पीड़ित की रकम सुरक्षित वापस कराई।” उन्होंने नागरिकों से अपील की कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक या धमकी भरे संदेश पर भरोसा न करें और तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें।
पीड़ित शिक्षक ने भावुक होकर कहा, “पुलिस ने मेरी न केवल रकम बचाई, बल्कि मेरी जान भी बचा ली।”