वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को कांग्रेस ने अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के दान और चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया। कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान भाजपा और योगी सरकार पर इस मुद्दे पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भगवान राम भाजपा के लिए केवल राजनीतिक मुद्दा बनकर रह गए हैं, जबकि रामलला मंदिर में चढ़ावे से जुड़े गंभीर आरोपों पर सरकार सदन में चर्चा नहीं चाहती।
आराधना मिश्रा ने आरोप लगाया कि मंदिर में चंदे और चढ़ावे की कथित चोरी कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित और संगठित लूट है, जो करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि देश और विदेश के श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा से मंदिर निर्माण के लिए दान दिया, लेकिन उस विश्वास के साथ छल हुआ है। उनका आरोप था कि सरकार इस पूरे मामले पर जवाबदेही तय करने के बजाय चर्चा से बच रही है। कांग्रेस नेता ने विधानसभा में विपक्ष की महिला विधायकों के साथ मार्शलों द्वारा धक्का-मुक्की किए जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सदन में रुककर विपक्ष के सवालों का जवाब देने से बच रहे हैं। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मामले पर देश के सामने जवाब देने की मांग की।
आराधना मिश्रा ने दावा किया कि मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों के भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद से संबंध रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य तथ्यों के बावजूद बड़े जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, जबकि छोटे कर्मचारियों को निशाना बनाया गया।
कांग्रेस ने इस मामले में पांच मांगें भी रखीं। इनमें सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र न्यायिक जांच, जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर, वर्तमान ट्रस्ट के पुनर्गठन, स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट तथा प्रधानमंत्री द्वारा पूरे मामले पर सार्वजनिक जवाब देने की मांग शामिल है। भाजपा की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।