— सीबीआई कोर्ट ने हत्या और साजिश का आरोप माना सिद्ध
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। करीब 24 वर्ष पुराने चर्चित स्वर्गीय इंद्रदेव सिंह एडवोकेट हत्याकांड में बुधवार को विशेष न्यायाधीश सीबीआई कोर्ट संख्या-2, लखनऊ ने अहम फैसला सुनाते हुए विक्रम यादव उर्फ कालिया, पन्ना सिंह, बृजेश कुमार यादव उर्फ मुन्ना और मुन्ना को भारतीय न्याय संहिता के अनुरूप तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 सहपठित धारा 120-बी के तहत दोषी करार दिया। वहीं, मामले के तीन अन्य आरोपित मन्नालाल गुप्ता, वेद प्रकाश उर्फ नेता और छोटेलाल उर्फ छोटू की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है।
अभियोजन के अनुसार, 8 अगस्त 2002 को शाम करीब साढ़े चार बजे कैसरबाग टेलीफोन एक्सचेंज के पीछे बक्शी दीदी के घर के पास लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय इंद्रदेव सिंह की सुनियोजित साजिश के तहत गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद उनकी पत्नी नयनतारा सिंह ने कैसरबाग कोतवाली में अपराध संख्या 259/2002 के तहत हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
अधिवक्ता आर.के. यादव ने बताया कि प्रारंभिक एफआईआर में रामकुमार वर्मा, सुरेश वर्मा, सुरजन वर्मा, सुरेश वर्मा और डॉ. सुषमा वर्मा को नामजद किया गया था। बाद में उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई की विवेचना में मन्नालाल गुप्ता, वेद प्रकाश उर्फ नेता, विक्रम यादव उर्फ कालिया, छोटेलाल उर्फ छोटू, बृजेश यादव उर्फ मुन्ना और पन्ना सिंह के नाम सामने आए। जांच में यह भी सामने आया कि विक्रम यादव उर्फ कालिया ने 12 बोर के तमंचे से इंद्रदेव सिंह को गोली मारी थी। सीबीआई ने वर्ष 2004 में आरोपपत्र दाखिल किया, जिसके बाद उसी वर्ष आरोप तय किए गए। करीब दो दशक से अधिक समय तक चली सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश वायु नंदन मिश्र ने चार आरोपितों को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी ठहराया। मामले में सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक केपी सिंह ने पैरवी की, जबकि वादी नयनतारा सिंह की ओर से अधिवक्ता आर.के. यादव ने न्यायालय में पक्ष रखा। दोषियों की सजा पर फैसला अगली सुनवाई में सुनाया जाएगा।