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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे धंसने पर हाई कोर्ट सख्त, केंद्र-यूपी सरकार समेत NHAI को नोटिस

– करीब 4200 करोड़ रुपये की लागत से बने 63 किमी लंबे इस 6-लेन एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का निर्माण PNC कंस्ट्रक्शन कंपनी ने किया था. निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसे NHAI को सौंप दिया गया था. मामले के तूल पकड़ने और वीडियो वायरल होने के बाद कंस्ट्रक्शन कंपनी PNC तुरंत मौके पर मरम्मत कार्य में जुट गई थी. वहीं, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर सफाई जारी की थी.
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण की गुणवत्ता और सड़क धंसने का मामला अब हाई कोर्ट पहुंच गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के साथ भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। निर्माण कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है।
न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीश शुक्ला की खंडपीठ के समक्ष अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने याचिका दाखिल की। याचिका में एक्सप्रेसवे के निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए सड़क के बार-बार धंसने की शिकायत की गई है। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे देश के सबसे अधिक टोल लेने वाले एक्सप्रेसवे में शामिल है और यहां करीब 4.37 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से टोल लिया जा रहा है। याचिका के अनुसार 13 जुलाई को कानपुर-लखनऊ एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का उद्घाटन बड़े स्तर पर किया गया था। उद्घाटन के दौरान इसकी गुणवत्ता की तुलना जर्मनी की विश्वस्तरीय सड़कों से किए जाने के दावे भी सामने आए थे। हालांकि, उद्घाटन के करीब 13 दिन बाद ही लगातार बारिश के बीच उन्नाव के कोरारी के पास छह लेन वाली सड़क का बड़ा हिस्सा कई मीटर तक धंस गया।
इस घटना के बाद एक्सप्रेसवे के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे थे। अब हाई कोर्ट ने संबंधित विभागों और निर्माण कंपनी से जवाब तलब किया है।
बताते चलें की करीब 4200 करोड़ रुपये की लागत से बने 63 किमी लंबे इस 6-लेन एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का निर्माण PNC कंस्ट्रक्शन कंपनी ने किया था. निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसे NHAI को सौंप दिया गया था. मामले के तूल पकड़ने और वीडियो वायरल होने के बाद कंस्ट्रक्शन कंपनी PNC तुरंत मौके पर मरम्मत कार्य में जुट गई थी. वहीं, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर सफाई जारी की थी। मामले की अगली सुनवाई में सरकार और अन्य पक्षों के जवाब के बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता तथा धंसने के कारणों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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