वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। कुत्ता काटे या चाटे, दोनों ही स्थितियों में लापरवाही घातक हो सकती है। ऐसे में घाव को तत्काल बहते पानी और साबुन से कम से कम 15 मिनट तक धोने के बाद नजदीकी चिकित्सालय पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार एंटी रेबीज वैक्सीन लगवानी चाहिए। विश्व रेबीज दिवस पर फार्मेसिस्ट फेडरेशन की ओर से आयोजित वेबिनार में अध्यक्ष सुनील यादव ने यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि विश्व रेबीज दिवस-2026 की थीम ‘स्ट्रॉन्गर टुगेदर’ है, जिसका उद्देश्य मानव स्वास्थ्य, पशु चिकित्सा, समुदाय और सरकार के समन्वय से रेबीज की रोकथाम पर जोर देना है। उन्होंने कहा कि कुत्ते के काटने पर पेट में इंजेक्शन लगने की पुरानी धारणा अब सही नहीं है। वर्तमान में वैक्सीन निर्धारित प्रोटोकाल के अनुसार दी जाती है, इसलिए इंजेक्शन के डर से उपचार में देरी नहीं करनी चाहिए।
यादव ने बताया कि रेबीज एक टीका-निवारणीय वायरल रोग है। एक बार केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में संक्रमण पहुंचने के बाद बीमारी बेहद घातक हो जाती है, जबकि समय पर पोस्ट एक्सपोजर प्रोफाइलेक्सिस (पीईपी) से बचाव संभव है। कुत्ते दुनिया में मानव रेबीज संक्रमण के अधिकांश मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। बच्चों को विशेष सावधानी की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कुत्ते, बिल्ली, बंदर या किसी संक्रमित जंगली जानवर के काटने, खरोंचने या खुले घाव अथवा आंख-मुंह की श्लेष्मा पर लार लगने की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह जरूरी है। घाव पर मिर्च आदि न लगाएं और बिना सलाह पट्टी न बांधें। उत्तर प्रदेश के सरकारी चिकित्सालयों में एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध कराई जाती है।
वेबिनार में प्रो. डॉ. प्रकाश वी. दीवान, डॉ. हरलोकेश नारायण, प्रो. मनोज यादव, डॉ. विष्णु, डॉ. वंदना, डॉ. अभिषेक समेत अन्य विशेषज्ञों ने भी जागरूकता का संदेश दिया।