वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
इलाहाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अंतिम आदेश पारित होने तक उनकी गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। साथ ही कोर्ट ने उन्हें जांच में पूर्ण सहयोग करने का निर्देश भी दिया है।
यौन उत्पीड़न के मामले में दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकलपीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत ने कहा कि जब तक अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक पुलिस कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगी। मामले की अगली सुनवाई मार्च के तीसरे सप्ताह में संभावित है।
अदालत में शंकराचार्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीएन मिश्रा ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल उपस्थित हुए। शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से अधिवक्ता रीना सिंह ने दलीलें पेश कीं। यह मामला तब सामने आया जब तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने धारा 173(4) के तहत जिला न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। इसके बाद विशेष न्यायाधीश (रेप एवं पॉक्सो) विनोद कुमार चौरसिया के आदेश पर झूंसी थाने में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरुद्ध बटुकों के यौन उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज किया गया। अग्रिम जमानत पर अंतरिम राहत मिलने के बाद उनके मठ में संतों और अनुयायियों ने संतोष व्यक्त किया। मठ में रंगभरी एकादशी के आयोजन की तैयारियां भी जारी हैं।
इसी बीच, शंकराचार्य के वकील श्रीनाथ त्रिपाठी को बम से उड़ाने की धमकी देने के आरोप में पुलिस ने अजीत कुमार सरोज नामक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसने पड़ोसी को फंसाने के उद्देश्य से धमकी भरा संदेश भेजा था। मामले की जांच जारी है। हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद अब सभी की नजर अंतिम फैसले पर टिकी है।
बताते चलें कि शंकराचार्य जैसी संस्था को बदनाम करने की कोशिश की गई। आज जो हालात हैं कि अपने भाई पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। सारा अमला भ्रष्ट नहीं हो सकता। कहीं तो कोई होगा, जिसके मन में न्याय होगा। इसलिए संघर्ष जारी रहना चाहिए। पूरे देश का हिंदू समुदाय आशंकित था। उन्हें लगने लगा था कि हमारे गुरु ने क्या गड़बड़ी की है। मुकदमा झूठा बनाया गया था। बटुक कभी आश्रम में नहीं रहे हैं।