– इन्वेस्ट यूपी और कंसाई फार्मास्युटिकल एसोसिएशन की अहम बैठक में सहयोग पर जोर
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। अवनीश अवस्थी ने राज्य की विश्वस्तरीय अवस्थापना सुविधाओं पर भी प्रकाश डाला, जिनमें 13 एक्सप्रेसवे (7 संचालित और 6 निर्माणाधीन), समेत 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और 16 घरेलू हवाई अड्डे शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में फार्मास्युटिकल निर्माण, नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुक्रवार को इन्वेस्ट यूपी कार्यालय में जापान की कंसाई फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के साथ एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में उत्तर प्रदेश और जापान की अग्रणी फार्मा कंपनियों के बीच रणनीतिक सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने की। इस दौरान इन्वेस्ट यूपी के वरिष्ठ अधिकारियों सहित भारत और जापान की कई नामी कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
वर्चुअल सत्र में जापान की 125 से अधिक प्रमुख फार्मास्युटिकल कंपनियां शामिल हुईं। जापानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व एसोसिएशन के महानिदेशक डॉ. योशिकाज़ु हयाशी और चुओ गाकुइन विश्वविद्यालय की प्रोफेसर अत्सुको कामीइके ने किया। भारत की ओर से टीआई मेडिकल्स, टॉरेंट फार्मा और थ्रीएक्सपर इनोवेंचर जैसी कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
प्रोफेसर कामीइके ने भारत की फार्मा उद्योग की विश्वसनीयता, नवाचार और प्रतिस्पर्धी क्षमता की सराहना करते हुए भारत को “दुनिया की फार्मेसी” बताया। अवनीश अवस्थी ने कहा कि उत्तर प्रदेश फार्मा निर्माण का एक अग्रणी केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य में केजीएमयू, एसजीपीजीआई, दो एम्स, 200 से अधिक मेडिकल कॉलेज और 25 से अधिक मेडटेक स्टार्टअप मौजूद हैं, जो फार्मा और हेल्थकेयर उद्योग के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार कर रहे हैं।
अवस्थी ने उत्तर प्रदेश की विश्वस्तरीय बुनियादी सुविधाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य में 13 एक्सप्रेसवे (7 संचालित और 6 निर्माणाधीन), 5 अंतरराष्ट्रीय और 16 घरेलू हवाई अड्डे हैं। उन्होंने निवेश प्रोत्साहन नीति 2023 का भी उल्लेख किया, जिसके तहत एफडीआई और ग्लोबल कंपनियों को आकर्षक प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।
बैठक के अंत में इन्वेस्ट यूपी ने जापानी प्रतिनिधिमंडल को राज्य में निवेश की संभावनाओं को तलाशने और उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अनुभव लेने के लिए आमंत्रित किया। यह पहल भारत-जापान के बीच फार्मास्युटिकल क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।