वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में चलती बस में नाबालिग के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले का सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्वतः संज्ञान लिया। अदालत ने घटना को गंभीरता से लेते हुए कहा कि इस तरह के मामले कानून लागू करने वाली एजेंसियों की व्यवस्थागत विफलता को उजागर करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को जनहित से जुड़ा मानते हुए इस पर सुनवाई शुरू करने का निर्णय लिया। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित एजेंसियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। चलती बस में नाबालिग के साथ ऐसी घटना होना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अदालत ने संकेत दिया कि मामले में केवल अपराध की जांच तक सीमित रहने के बजाय उन व्यवस्थागत खामियों पर भी गौर किया जाएगा, जिनके कारण ऐसी घटना को अंजाम दिया जा सका। सार्वजनिक परिवहन में निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की भूमिका भी न्यायिक पड़ताल के दायरे में आ सकती है।
सुप्रीम कोर्ट का स्वतः संज्ञान ऐसे मामलों में जवाबदेही और सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप माना जा रहा है। अदालत की कार्यवाही का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक परिवहन में बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्थाएं लागू हों और कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई हो।