वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। ग्रामीण इलाकों में जल उपलब्धता, भूजल स्तर में गिरावट और संभावित जल संकट वाले क्षेत्रों की पहचान के लिए प्रदेश सरकार ने व्यापक सर्वे अभियान शुरू करने का फैसला किया है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस संबंध में उच्च अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करते हुए कहा है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा विकसित जलदूत ऐप के माध्यम से एकत्र किए जाने वाले आंकड़े भविष्य में जल संरक्षण की योजनाएं तैयार करने में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों के आधार पर वर्षा जल संचयन कार्यों की प्राथमिकता तय करने के साथ ही जल संकट से प्रभावित क्षेत्रों की सटीक पहचान संभव हो सकेगी।
प्रदेश में प्री मानसून 2026 अभियान के तहत ग्राम पंचायतों में भूजल स्तर का आकलन जलदूत ऐप के माध्यम से किया जाएगा। ग्राम्य विकास विभाग, उत्तर प्रदेश की ओर से इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। यह विशेष अभियान 25 मई से 15 जून 2026 तक संचालित किया जाएगा। सभी जिलों के उपायुक्तों (श्रम रोजगार) को निर्देशित किया गया है कि ग्राम पंचायतों में चयनित कुओं का भूजल स्तर वैज्ञानिक पद्धति और निर्धारित मानकों के अनुरूप मापा जाए तथा संबंधित आंकड़े तत्काल जलदूत ऐप पर अपलोड किए जाएं।
निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि मापन कार्य के दौरान मेजरिंग टेप का प्रयोग अनिवार्य रूप से किया जाएगा और प्रत्येक स्थल का फोटो प्रलेखन भी कराया जाएगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि किसी एक ग्राम पंचायत के सभी चयनित कुओं का डेटा एक ही दिन में संकलित किया जाए, ताकि आंकड़ों की सटीकता बनी रहे।
आयुक्त, ग्राम्य विकास विभाग जी.एस. प्रियदर्शी ने बताया कि मानसून पूर्व कराया जा रहा यह भूजल सर्वेक्षण जल संरक्षण, जल संसाधन प्रबंधन और भविष्य की योजनाओं के निर्माण में अत्यंत उपयोगी साबित होगा। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट की समय रहते पहचान कर प्रभावी समाधान की दिशा में कदम उठाए जा सकेंगे।