वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी) / अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र राज्यपाल द्वारा विधानमंडल के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करने की संसदीय परंपरा के साथ प्रारंभ हुआ। राज्यपाल का यह अभिभाषण औपचारिक रूप से सत्र की शुरुआत का संकेत था, किंतु इसे लेकर विपक्ष और जनमानस में मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं।
बसपा प्रमुख मायावती ने कहा का कहना है कि राज्यपाल का भाषण परंपरा से हटकर यदि प्रदेश के समग्र विकास, सर्वसमाज के उत्थान और व्यापक जनहित से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर अधिक केंद्रित होता, तो यह अधिक प्रभावी और आश्वस्त करने वाला होता।
प्रदेश भर में सर्वसमाज के करोड़ों लोग वर्तमान समय में महंगाई, बेरोज़गारी और आर्थिक असुरक्षा जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इन परिस्थितियों के कारण अनेक परिवारों को गंभीर सामाजिक और पारिवारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इन बुनियादी समस्याओं के साथ-साथ आम जनता को अपनी जान-माल और धार्मिक सुरक्षा को लेकर भी चिंताएँ सता रही हैं, जिन पर राज्यपाल के अभिभाषण में अपेक्षित रूप से ध्यान नहीं दिया गया।
इन्हीं कारणों से राज्यपाल के संबोधन के दौरान विपक्षी सदस्यों ने नारेबाज़ी की और सदन में हंगामे की स्थिति बनी रही। विपक्ष का यह भी कहना है कि अभिभाषण में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार द्वारा किए गए जनहित और जनकल्याण से जुड़े बड़े-बड़े दावों, घोषणाओं और वादों की प्रगति का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया, जिससे जनता की चिंताएँ और बढ़ गई हैं।
राजनीतिक हलकों में यह अपेक्षा जताई जा रही है कि आगामी बजट भाषण में सरकार इन मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए ठोस प्रावधान और स्पष्ट दिशा प्रस्तुत करेगी, ताकि प्रदेश की जनता और विपक्ष दोनों को भरोसा मिल सके।