वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/ अजय कुमार वर्मा
कानपुर। यूरिक एसिड बढ़ने से हृदय की पंपिंग घट जाती है। जिससे हार्ट फेल का खतरा बढ़ जाता है। जीएसवीएम के मेडिसिन विभाग ने हार्ट फेल के रोगियों पर शोध के बाद यह निष्कर्ष निकाला।
यूरिक एसिड अगर सामान्य से अधिक सात मिग्रा प्रति डेसीलीटर से ऊपर है, तो हृदय की पंपिंग क्षमता प्रभावित हो रही है। हार्ट फेल की स्थिति कभी भी पैदा हो सकती है। रोगी को फौरन हृदय रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में हार्ट फेल के रोगियों पर हुए ताजा शोध में यह नया तथ्य सामने आया है। शोध में सुझाव दिया गया है कि यूरिक एसिड की जांच एक नए मार्कर के रूप में इस्तेमाल की जा सकती है। जब हृदय पर दबाव अधिक बढ़ता है तो रक्त में यूरिक एसिड बढ़ जाता है। हार्ट फेल के रोगियों में यूरिक एसिड की स्थिति को लेकर मेडिसिन विभाग में यह पहला शोध हुआ है। इस मार्कर के जरिये दूर-दराज अंचलों में रहने वाले हार्ट फेल की स्थिति वाले वे रोगी सचेत हो सकेंगे, जिनके आसपास हृदय की इको जांच की सुविधा नहीं है। इस शोध में हार्ट फेल के 112 रोगियों पर अध्ययन किया गया। मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. बीपी प्रियदर्शी और कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहित सचान की देखरेख में यह अध्ययन डॉ. साल्वी शर्मा ने किया है। मेडिसिन विभाग में यह अध्ययन डेढ़ साल तक किया गया।
डॉ. साल्वी शर्मा ने बताया कि हार्ट फेल के रोगियों में यूरिक एसिड बढ़ा हुआ पाया गया। रोगियों के दो ग्रुप बनाए गए। एक में वे रोगी थे जिनका यूरिक एसिड सात मिग्रा से कम था और दूसरे सात मिग्रा से अधिक वाले रोगी थे। सात मिग्रा से अधिक यूरिक एसिड वाले रोगियों को जटिलताएं अधिक आईं। उन्हें अधिक दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ा। आईसीयू में भी भर्ती होना पड़ा। हाई यूरिक एसिड वाले हार्ट फेल के रोगियों की मृत्यु दर अधिक थी। इनके हृदय की पंपिंग क्षमता सामान्य 60 प्रतिशत के स्थान पर 20 से 30 प्रतिशत पाई गई। इन्हें गंभीर श्रेणी में रखा गया। यह सुझाव दिया गया कि सात मिग्रा से अधिक यूरिक एसिड आने पर रोगी कार्डियोलॉजी रेफर किया जाए।
इसलिए बढ़ता यूरिक एसिड: स्ट्रेस बढ़ने पर हृदय पर दबाव आता है। इससे हृदय की पंपिंग क्षमता घट जाती है। इसके असर से पेनथिन आक्सीडेज एंजाइम सक्रिय हो जाता है और यूरिक एसिड बढ़ जाता है। गुर्दे में पथरी बन जाती है, गुर्दे की छन्नियां खराब हो जाती हैं, अस्थियों के जोड़ों में गठिया होता है।