वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रह चुकीं एवं पूर्व सांसद बहन कु. मायावती ने 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशवासियों और दुनिया भर में रह रहे भारतीयों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल औपचारिक उत्सव का नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का दिन है, जब यह ईमानदारी से आकलन किया जाना चाहिए कि केंद्र और राज्य सरकारें केवल वादों तक सीमित हैं या संविधान की वास्तविक मंशा के अनुरूप राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र को मजबूत करने में सफल रही हैं।
उन्होंने कहा कि आजादी और संविधान लागू होने के दशकों बाद भी देश में गरीबी और बेरोजगारी जैसी मूल समस्याएं बनी हुई हैं। कुछ गिने-चुने अमीरों के मुकाबले बहुसंख्यक आबादी अब भी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रही है, जो गंभीर चिंता का विषय है। मायावती ने कहा कि भारत अपने संवैधानिक मूल्यों के कारण विश्व में नैतिक शक्ति के रूप में जाना जाता था, लेकिन बदलते वैश्विक परिदृश्य में यह सवाल जरूरी है कि क्या देश आज भी उसी भूमिका में है।
उन्होंने घुसपैठियों और विदेशियों की पहचान को उचित बताया, लेकिन इसके नाम पर करोड़ों भारतीयों को दस्तावेजी जटिलताओं में उलझाने पर सरकार को वैकल्पिक और सरल उपाय अपनाने की सलाह दी। साथ ही, धर्म परिवर्तन जैसे मुद्दों पर विभाजनकारी राजनीति और हिंसा पर रोक लगाने की जरूरत बताई। अंत में उन्होंने बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, अशिक्षा और सामाजिक असमानता पर चिंता जताते हुए सरकारों से संविधान आधारित सर्वजन हित और जनकल्याण की नीति पर ईमानदारी से अमल करने का आह्वान किया।