वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ । प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के संगम दर्शन हेतु जा रहे काफिले में शामिल एक 80 वर्षीय वृद्ध संत के साथ पुलिस द्वारा की गई कथित बर्बरता को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह ने इस घटना को अत्यंत निंदनीय, अमानवीय और शर्मनाक बताते हुए प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सुनील सिंह ने कहा कि एक वृद्ध संत के साथ मारपीट और जूतों से कुचलने जैसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि सत्ता के संरक्षण में पुलिस निरंकुश होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग स्वयं को हिंदू धर्म का रक्षक और ठेकेदार बताते हैं, वही आज शंकराचार्य जैसे प्रतिष्ठित संतों और उनसे जुड़े साधु-संतों पर हमले करवा रहे हैं। यह स्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और समाज के लिए चिंताजनक संकेत देती है।
लोकदल अध्यक्ष ने कहा कि हिंदू धर्म की रक्षा दिखावे, नफरत और हिंसा से नहीं, बल्कि संतों के सम्मान, सनातन परंपराओं की रक्षा और सत्य के साथ खड़े होने से होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज और उनसे जुड़े संतों पर हुआ हमला किसी एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि सनातन धर्म की आत्मा, उसकी परंपराओं और श्रद्धा पर सीधा प्रहार है।
सुनील सिंह ने सवाल उठाया कि यदि आज संत सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा की क्या गारंटी रह जाती है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। लोकदल ने इस कायराना घटना की कड़ी निंदा करते हुए पीड़ित संत को न्याय दिलाने की अपील की है।