वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बांग्लादेशी सहित विभिन्न स्तरों पर हो रही अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए योगी सरकार ने एक बहुस्तरीय और सख्त प्लान तैयार किया है। सरकार का दावा है कि यह मॉडल न सिर्फ प्रदेश में घुसपैठ पर रोक लगाएगा, बल्कि पूरे देश के लिए आदर्श रूप में उभरेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर घुसपैठ रोकने के लिए एक फूलप्रूफ रणनीति को अंतिम रूप दिया, जिसमें हाईटेक मॉडर्न टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर विशेष जोर है।
जानकारी के अनुसार सरकार अवैध रूप से रह रहे घुसपैठियों की पहचान के लिए उन्नत तकनीक का उपयोग कर रही है, जिससे फर्जी दस्तावेजों पर आधारित पहचान को तुरंत पकड़ा जा सके। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्तर पर कमी न रहने पाए और हर संदिग्ध को सत्यापन के बाद डिटेंशन सेंटर भेजा जाए। सरकार की योजना के तहत डिटेंशन सेंटरों को अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली से लैस किया जा रहा है, जिसे अभेद्य बनाने की तैयारी है। सूत्रों के मुताबिक इन सेंटरों में रखे जाने वाले घुसपैठियों की विस्तृत बायोमेट्रिक प्रोफाइल तैयार की जाएगी, जिसमें फिंगरप्रिंट, फेशियल रिकॉग्निशन और अन्य पहचान संबंधी डेटा शामिल होगा।
सरकार इन सभी व्यक्तियों के नामों को निगेटिव लिस्ट में शामिल करेगी। यह लिस्ट पूरे देश में साझा की जाएगी, ताकि कोई भी घुसपैठिया भविष्य में न तो राज्य में दाखिल हो सके और न ही किसी सरकारी पहचान प्रणाली में आधार कार्ड जैसी दस्तावेजी पहचान बनवा सके। अधिकारियों का कहना है कि हाईटेक टेक्नोलॉजी की मदद से फर्जी पहचान पत्रों, बैंक दस्तावेजों, राशन कार्ड, मोबाइल सिम आदि से संबंधित सभी रिकॉर्ड की जांच की जाएगी, जिससे यह पता चल सके कि घुसपैठिए कब और कैसे प्रदेश में प्रवेश कर सक्रिय हुए।
बताया जाता है कि सरकार की मंशा इस प्रक्रिया के माध्यम से उन नेटवर्कों को भी उजागर करने की है, जो फर्जी दस्तावेज बनवाने में मदद करते हैं। ऐसे नेक्सस का भंडाफोड़ होने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि आगे कोई भी व्यक्ति गलत पहचान बनवाकर प्रदेश में न रह सके। योगी सरकार का मानना है कि उन्नत तकनीक और डिटेंशन सेंटरों की सख्त नीति राज्य की सुरक्षा को मजबूत करेगी और अवैध घुसपैठ पर स्थायी रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।