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चुनाव सुधार पर चर्चा के बीच BSP ने मतदाता सूची, आपराधिक पृष्ठभूमि और EVM पर उठाए गंभीर सवाल

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। संसद में चुनाव सुधार को लेकर जारी चर्चा के बीच बहुजन समाज पार्टी ने चुनाव आयोग की मौजूदा प्रक्रिया और समयसीमा पर गंभीर आपत्ति जताई है। पार्टी ने कहा है कि SIR के तहत मतदाता सूची संशोधन की समय सीमा बेहद कम है, जिससे BLO पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है और कई मामलों में उन्हें जान तक गंवानी पड़ी है। BSP का कहना है कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में 15.40 करोड़ से अधिक मतदाता हैं। ऐसे में जल्दबाज़ी में SIR प्रक्रिया पूरी करने से बड़ी संख्या में गरीब और प्रवासी मतदाताओं के नाम सूची से गायब हो सकते हैं, जो उनके संवैधानिक अधिकार का हनन होगा। पार्टी ने समय सीमा बढ़ाने की मांग की है।
BSP ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशियों की सूचना के प्रकाशन की जिम्मेदारी राजनीतिक दलों पर डालने के प्रावधान का भी विरोध किया है। पार्टी का कहना है कि कई प्रत्याशी टिकट लेते समय अपना आपराधिक इतिहास छिपाते हैं, जबकि जिम्मेदारी दल पर डाल दी जाती है। इसलिए सभी कानूनी दायित्व प्रत्याशी पर ही होना चाहिए।
इसके साथ ही पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जोर देते हुए बैलेट पेपर की वापसी या कम से कम सभी बूथों पर VVPAT स्लिप की 100 प्रतिशत गिनती अनिवार्य करने की मांग की है। BSP ने कहा कि अतिरिक्त समय लगने का तर्क उचित नहीं है, जबकि चुनाव प्रक्रिया महीनों चलती है। पार्टी का कहना है कि यह कदम जनता का चुनाव प्रणाली पर विश्वास बढ़ाने और शंकाओं पर विराम लगाने के लिए अनिवार्य है।

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