वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो पर अब तक का सबसे गंभीर आरोप लगा है। Federation of Indian Pilots (FIP) ने दावा किया है कि हजारों फ्लाइट कैंसिल और लाखों यात्रियों को प्रभावित करने वाला हालिया ऑपरेशनल संकट “पूरी तरह प्री-प्लांड” था। फेडरेशन का कहना है कि एयरलाइन को दो दिसंबर से ही पता था कि क्रू स्टाफिंग और सॉफ्टवेयर समस्या के कारण नेटवर्क ढह जाएगा, इसके बावजूद प्रबंधन ने स्थिति को संभालने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
पायलट फेडरेशन का आरोप है कि एयरलाइन ने जानबूझकर हालात बिगड़ने दिए, ताकि सरकार पर FDTL नियमों में ढील देने का दबाव बनाया जा सके। फेडरेशन ने दावा किया कि एयरक्राफ्ट उपलब्ध थे, क्रू भी मौजूद था, फिर भी भारी संख्या में उड़ानें रद्द की गईं। फेडरेशन ने पूरे मामले की न्यायिक जांच, इंडिगो के शीर्ष प्रबंधन के खिलाफ आपराधिक मुकदमे और यात्रियों को भारी मुआवजा देने की मांग की है।
इसी बीच संसद की परिवहन संबंधी स्थायी समिति के सदस्य सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने कहा कि यदि यह साबित होता है कि संकट जानबूझकर पैदा किया गया, तो इंडिगो का लाइसेंस रद्द होना चाहिए। उन्होंने एयरलाइन के रवैये को “निर्लज्ज, लापरवाह और अक्षम्य” बताया।
संकट के बीच शेयर बाजार में भी इंडिगो को जोरदार झटका लगा है। कंपनी के शेयर लगभग 15 प्रतिशत तक लुढ़ककर निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरावट वाले स्टॉक में शामिल हो गए। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इंडिगो ने नियमों में राहत पाने के लिए पूरी इंडस्ट्री और लाखों यात्रियों को अपने संकट का ‘बंधक’ बना लिया था। जांच के बाद ही इस आरोप की सच्चाई सामने आ पाएगी।